**बाढ़ राहत या खानापूर्ति? मोकामा में जंजीरा दियारा के विस्थापितों का छलका दर्द, अंचल प्रशासन के दावों की खुली पोल**
गंगा नदी के विकराल रूप धारण करने से मोकामा स्थित जंजीरा दियारा जलमग्न हो चुका है। आशियाना डूबने के बाद बेघर हुए सैकड़ों लोग किसी तरह जान बचाकर मोकामा अंचल क्षेत्र में शरण लेने को मजबूर हैं। हालांकि, सरकारी मदद के नाम पर विस्थापितों को सिर्फ आश्वासन और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।
अंचल प्रशासन की कार्यशैली से बाढ़ पीड़ितों में गहरा रोष व्याप्त है। प्रभावित लोगों का आरोप है कि हजारों की आबादी के बीच मात्र नाममात्र के लोगों को प्लास्टिक (पाल) बांटे गए हैं। मवेशियों के चारे की स्थिति और भी दयनीय है; जिनके पास 5 से 7 मवेशी हैं, उन्हें महज एक मन भूसा (कटुआ) थमाकर औपचारिकता पूरी कर ली गई है। राहत शिविरों में भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि दोनों समय सिर्फ दाल-भात परोसा जा रहा है, जिसमें न तो पौष्टिकता है और न ही बच्चों व बुजुर्गों की जरूरतों का ध्यान रखा जा रहा है।
दूसरी ओर, मोकामा अंचल अधिकारी (सीओ) लवली कुमारी का दावा है कि प्रशासन की तरफ से बाढ़ पीड़ितों के लिए तमाम पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और राहत सामग्री का वितरण सुचारू रूप से हो रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
प्रशासनिक दावों और जमीनी सच्चाई के बीच पिस्ते छोटे-छोटे बच्चे और बुजुर्ग प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ लाचार व्यवस्था के आगे पूरी तरह बेबस नजर आ रहे हैं। दियारा वासियों की मांग है कि राहत शिविरों में पशुचारे, बच्चों के लिए दूध, मेडिकल सुविधा और सम्मानजनक भोजन की तत्काल व्यवस्था की जाए ताकि इस मानवीय संकट से उबरा जा सके।
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Mokameh, Patna | Sep 7, 2026