टाटीझरिया: टाटीझरिया के गरमरा में सुधरे चापाकल, पब्लिक ऐप ने आदिवासियों की प्यास की आवाज उठाई
टाटीझरिया के गरमरा में सुधरे चापाकल, पब्लिक ऐप ने प्रमुखता से उठाई थी आदिवासियों की प्यास और बेबसी की आवाज; हरकत में आया पेयजल विभाग। मीडिया अगर जनता के दर्द को ईमानदारी से उठाए, तो सोई हुई व्यवस्था को भी जागना ही पड़ता है। बेबसी के आंसू रोते आदिवासी बहुल गांव 'गरमरा' में आजादी के सात दशक बाद भी इंसान और जानवरों के एक ही गड्ढे से पानी पीने के लिए विवश थे।