पीलीबंगा पालिका अध्यक्ष चुनाव: 18 सीटों के बहुमत के बावजूद भाजपा में उलझा पेंच, 3 नामांकन से अंतर्कलह की चर्चा तेज; विधायक गोठवाल बोले—'फूट का फायदा कांग्रेस को, हमारा बोर्ड बनना तय'
लालबहादुर भाखर
पीलीबंगा। नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पीलीबंगा का सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। 35 वार्डों वाली नगर पालिका में 18 पार्षदों के साथ स्पष्ट व पूर्ण बहुमत होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से तीन प्रत्याशियों द्वारा नामांकन दाखिल किए जाने से भारी संशय और अंदरूनी खींचतान की स्थिति बन गई है। वहीं, इस सियासी घमासान के बीच कांग्रेस ने बहुमत में सेंधमारी का दावा ठोकते हुए बोर्ड बनाने का ऐलान कर दिया है।
राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत अधिकृत पार्टी सिंबल नामांकन की अंतिम तिथि 16 तारीख को दोपहर 3:00 बजे तक रिटर्निंग अधिकारी (RO) के समक्ष भौतिक रूप से जमा कराना अनिवार्य होता है। नियमों के अनुसार यदि एक से अधिक पर्चे दाखिल हैं, तो 18 तारीख दोपहर 3:00 बजे नाम वापसी तक अतिरिक्त प्रत्याशियों को नामांकन वापस लेना होगा; अन्यथा अधिकृत अंतिम सूचना के आधार पर सिंबल तय होगा और शेष दावेदार निर्दलीय की श्रेणी में आ जाएंगे। भाजपा खेमे से तीन नामांकन आने के बाद से ही बगावत और भीतरघात की अटकलें तेज हो गई हैं।
विधायक गोठवाल का दावा—'भाजपा पार्षद हमारे संपर्क में, कांग्रेस बनाएगी बोर्ड'
इधर, भाजपा की इस कलह के बीच पीलीबंगा से कांग्रेस विधायक विनोद कुमार गोठवाल ने प्रेस वार्ता कर बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। विधायक गोठवाल ने कहा कि कांग्रेस के 15 निर्वाचित पार्षद पूरी तरह एकजुट हैं और 2 निर्दलीय पार्षदों ने भी पार्टी को बिना शर्त समर्थन दे दिया है। बहुमत के लिए महज एक अतिरिक्त मत की दरकार है।
विधायक ने दावा किया कि भाजपा के 1 से 2 पार्षद लगातार कांग्रेस के संपर्क में हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के पास बहुमत का आंकड़ा होते हुए भी तीन-तीन प्रत्याशियों से पर्चे भरवाना यह साबित करता है कि पार्टी में भारी अंतर्कलह और अविश्वास का माहौल है। गोठवाल ने साफ कहा कि भाजपा की इसी अंदरूनी फूट का सीधा लाभ कांग्रेस को मिलेगा और पीलीबंगा नगर पालिका में कांग्रेस का बोर्ड बनना पूरी तरह तय है।
अब सारा दारोमदार 18 तारीख को नाम वापसी के अंतिम समय पर टिक गया है, जहां यह साफ होगा कि भाजपा अपने असंतुष्टों को साध पाती है या फिर क्रॉस वोटिंग के सहारे बाजी कांग्रेस के हाथ चली जाती है। Part 4