#सेवा_संकल्प_अभियान
कहानी बदलाव की
20 वर्षों की परंपरागत कारीगरी को मिला नया संबल, पीएम विश्वकर्मा योजना से बढ़ी तेरसिंग भूरिया की आय
टूलकिट, कौशल प्रशिक्षण और रियायती ऋण से व्यवसाय को मिली मजबूती, रोजगार के साथ बनी सामाजिक पहचान
पेटलावद विकासखंड के ग्राम तारखेड़ी निवासी श्री तेरसिंग भूरिया लगभग 20 वर्षों से अपने परंपरागत आर्मरर व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। वर्षों से अपने हुनर और अनुभव के आधार पर कार्य कर रहे श्री भूरिया के लिए प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना अपने परंपरागत व्यवसाय को अधिक व्यवस्थित और बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने का माध्यम बनी है। योजना के अंतर्गत मिले कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट और रियायती दर पर बैंक ऋण से उनके कार्य को नया संबल मिला है। इसका सकारात्मक प्रभाव उनकी आय पर भी पड़ा है और परंपरागत कारीगर के रूप में उनकी पहचान को भी मजबूती मिली है।
परंपरागत हुनर को मिला कौशल प्रशिक्षण का साथ
श्री तेरसिंग भूरिया लंबे समय से अपने परंपरागत व्यवसाय के माध्यम से आजीविका अर्जित कर रहे थे। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की जानकारी मिलने के बाद वे योजना से जुड़े। योजना के अंतर्गत उन्होंने झाबुआ स्थित CGSSC संस्था के माध्यम से 5 दिवसीय कौशल प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें अपने परंपरागत कार्य को और बेहतर तरीके से करने तथा उपलब्ध संसाधनों एवं उपकरणों का प्रभावी उपयोग करने संबंधी प्रशिक्षण प्राप्त हुआ।
प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा उन्हें टूलकिट प्रदान की गई। टूलकिट मिलने से उनके कार्य के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता बेहतर हुई और उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहायता मिली।
एक लाख रुपये के रियायती ऋण से व्यवसाय को मिला आर्थिक आधार
परंपरागत व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए पूंजी की आवश्यकता को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से पूरा करने में भी सहायता मिली। श्री भूरिया को बैंक ऑफ इंडिया, पेटलावद द्वारा एक लाख रुपये का ऋण 5 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर प्रदान किया गया। इस वित्तीय सहायता से उन्हें अपने व्यवसाय के संचालन और विस्तार के लिए आवश्यक आर्थिक आधार प्राप्त हुआ।
प्रशिक्षण, टूलकिट और वित्तीय सहायता के समन्वित लाभ से श्री भूरिया अपने वर्षों पुराने परंपरागत हुनर को आजीविका के बेहतर माध्यम के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।
सामान्य दिनों में 10 हजार, पर्व-त्योहार और मेलों में 20 हजार रुपये तक मासिक आय
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से जुड़ने के बाद श्री तेरसिंग भूरिया की आय में वृद्धि हुई है। वर्तमान में वे अपने परंपरागत व्यवसाय से सामान्य दिनों में लगभग 10 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रहे हैं। वहीं पर्व-त्योहारों एवं मेलों के अवसर पर कार्य और मांग बढ़ने से उनकी मासिक आय लगभग 20 हजार रुपये तक पहुंच जाती है।
आय में हुई वृद्धि से उन्हें अपने व्यवसाय को निरंतर जारी रखने के साथ आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिला है। विशेष रूप से प्रशिक्षण एवं टूलकिट के माध्यम से परंपरागत कौशल को प्रोत्साहन और रियायती ऋण के माध्यम से आर्थिक सहायता मिलने से उनके रोजगार को मजबूती मिली है।
रोजगार के साथ परंपरागत कारीगर के रूप में बनी पहचान
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना श्री तेरसिंग भूरिया के लिए केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके वर्षों पुराने हुनर को आगे बढ़ाने में भी सहायक बनी है। योजना के माध्यम से उन्हें अपने परंपरागत व्यवसाय को निरंतर जारी रखने, आय में वृद्धि करने और कारीगर के रूप में अपनी सामाजिक पहचान को मजबूत करने का अवसर मिला है।
श्री तेरसिंग भूरिया बताते हैं कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से मिले प्रशिक्षण, टूलकिट एवं ऋण सहायता ने उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहयोग दिया है। योजना का लाभ मिलने से उनकी आय बढ़ी है और रोजगार में निरंतरता आई है। इसके लिए उन्होंने भारत सरकार एवं प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के प्रति आभार व्यक्त किया।
सेवा-संकल्प अभियान अंतर्गत श्री तेरसिंग भूरिया की यह “कहानी बदलाव की” इस बात का उदाहरण है कि परंपरागत कारीगरों के कौशल को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और वित्तीय सहायता का साथ मिलने पर उनका हुनर आय और स्वरोजगार का अधिक सशक्त माध्यम बन सकता है।
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4 views | Jhabua, Madhya Pradesh | Sep 19, 2026