गन्ना किसानों को मिलेगा 30 साल का 15% ब्याज हाईकोर्ट का बड़ा आदेश...
गन्ना किसानों के भुगतान और चीनी के दाम को लेकर इंटरनेशनल किसान यूनियन ने बड़ा मुद्दा उठाया है। यूनियन के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक रवि पवार जी ने खास बातचीत में सरकार और चीनी मिलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
रवि पवार ने बताया कि वे पिछले 15 साल से किसान संगठनों में काम कर रहे हैं। पिछले महीने हरिद्वार में उनकी मुलाकात केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से हुई थी, जहाँ उन्होंने ज्ञापन सौंपा था।
उनका कहना है कि चीनी का रेट 45-46 रुपये से बढ़कर 70 रुपये तक पहुँच गया है, यानी लगभग डेढ़ गुना बढ़ोतरी हुई है। लेकिन किसान को आज भी गन्ने का दाम सिर्फ 450 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, जबकि किसान की लागत 650 से 700 रुपये तक आ रही है। किसान सिर्फ 600 रुपये की मांग कर रहा है। हालांकि सरकार ने अब चीनी का दाम थोड़ा कम कर दिया है।
इसी के साथ उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का जिक्र किया। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि जिनके गन्ना भुगतान में देरी हुई है, उन्हें पिछले 30 साल का 15% की दर से ब्याज दिया जाए। पवार ने बताया कि 1966 में भी 12% ब्याज का नियम था जो 1-2 साल चला और समाजवादी सरकार में रोक दिया गया था।
सबसे बड़ी समस्या ये है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी चीनी मिल और गन्ना समितियाँ किसानों को उनका रिकॉर्ड नहीं दे रही हैं। मिल कहती है सोसाइटी में जाओ, सोसाइटी कहती है मिल में जाओ। बिना रिकॉर्ड के किसान अपना ब्याज कैसे जोड़ेगा।
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Dehradun, Dehradun | Sep 16, 2026