बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपने साथ हुई ज्यादती को ठीक तरह से सामने नही ला पाते, लेकिन जब इस बेटे ने स्वास्थ विभाग की लापरवाही को सामने लाकर रखा, तो जरूरत है कि इसकी जांच कराई जाए। ये मामला जलालाबाद थाना क्षेत्र का है।
बेटे सार्थक का आरोप है कि स्ट्रेचर नही मिला, कंधे के सहारे जलालाबाद सीएचसी लेकर गए, तो फिर वहां पर लगे सीसीटीवी कैमरे में सब कैद हुआ होगा। आसानी से जांच हो जाएगी।
आरोप है कि डाक्टर को फोन करके बुलाना पड़ा, तो फिर काॅल डिटेल निकलवाई जाए ताकि सच सामने आए कि काॅल के कितने देर बाद डाक्टर पहुंचे थे।
फिर जो आक्सीजन सिलेंडर दिया गया, उसकी जांच कराई जाए, क्योकि आरोप ये है कि जलालाबाद से चलने के बाद बरेली मोड़ पर आने के बाद सिलेंडर खत्म हो गया था। सीसीटीवी कैमरे में सब आया होगा कि कौन सा आक्सीजन सिलेंडर लगाया गया था। उसकी जांच कराई जाए। ताकि पिता को खोने वाले बेटे को न्याय मिल सके।
याद होगा कि इसी जलालाबाद सीएचसी पर डीएम ने अचानक निरीक्षण किया था। तब कितनी लापरवाही और खामियां सामने आई थी ये किसी से छुपा नही है। डाक्टर से लेकर पूरा स्टाफ नदारद था।
जब ऐसे आरोप लगते हैं, तो शाहजहांपुर के स्वास्थ विभाग के वो घोटाले याद आते हैं जिसको कितनी शिद्दत के साथ किया होगा और उतनी शिद्दत के साथ ठंडे बस्ते में भी डाल दिया गया। जबकि उसकी एफआईआर भी दर्ज की गई थी। जितनी शिद्दत से घोटाले करते हैं अगर उतनी मेहनत से मरीजों का इलाज कर दें तो पुन्य के साथ साथ इमानदारी की सैलरी पाकर सुकून भी मिलेगा।