#ऐतिहासिक_खोज
•••••सुपौल के त्रिलोकधाम गोसपुर में मिलीं 600 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियाँ, देश की एकमात्र हस्तलिखित 'भृगुसंहिता' ••••••बिहार का सुपौल जिला एक बार फिर देश के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मानचित्र पर अपनी समृद्ध विरासत के लिए चमक उठा है। जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत त्रिलोकधाम गोसपुर ग्राम में 15वीं सदी का अत्यंत दुर्लभ काव्य अलंकार ग्रंथ "कुवलयानंद" और पूरे भारतवर्ष में एकमात्र उपलब्ध हस्तलिखित "भृगुसंहिता" मिलने से देश के बुद्धिजीवियों, शोधकर्ताओं और इतिहासकारों में हर्ष का माहौल है,
#इस ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व की धरोहर की जानकारी मिलते ही सुपौल के जिलाधिकारी सावन कुमार (भा0प्र0से0) एवं पुलिस अधीक्षक, सुपौल शरथ आर0 एस0 (भा0पु0से0) ने स्वयं गोसपुर ग्राम पहुंचकर इन दुर्लभ पांडुलिपियों का गहन अवलोकन किया,
-----600 वर्ष प्राचीन ज्ञान का जीवंत उदाहरण,
#प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि लगभग 600 वर्ष पुरानी ये पांडुलिपियाँ संस्कृत, हिंदी और मिथिलाक्षर लिपियों में लिखित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज इस बात का साक्षात प्रमाण है कि सुपौल जिला और संपूर्ण मिथिलांचल सदियों से बौद्धिक उन्नति, व्याकरण, न्याय और उच्च कोटि की ज्ञान परंपरा का मुख्य केंद्र रहा है।
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