"आशा कार्यकर्ताओं ने फिर भरी हुंकार: समय पर भुगतान और सम्मानजनक मानदेय की उठी मांग"
मैदान में उतरी आशा-ऊषा एवं पर्यवेक्षक
प्रदेशव्यापी प्रदर्शन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, वेतन वृद्धि सहित नौ सूत्रीय रखी मांगे
डिंडौरी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत कार्यरत आशा, ऊषा एवं आशा पर्यवेक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के नाम ज्ञापन सौंपा। आशा-ऊषा-आशा पर्यवेक्षक एकता यूनियन (सीटू) ने प्रोत्साहन राशि के नियमित भुगतान, वेतन वृद्धि तथा कार्य परिस्थितियों में सुधार की मांग करते हुए सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप की अपील की है।
यूनियन का आरोप है कि प्रदेशभर में आशा एवं आशा पर्यवेक्षकों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान कई बार महीनों तक लंबित रहता है तथा भुगतान में कटौती की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं। संगठन का कहना है कि भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होने से कार्यकर्ताओं को यह जानकारी तक नहीं मिल पाती कि उनके खाते में कितनी राशि स्वीकृत हुई और कितनी राशि का भुगतान किया गया।
ज्ञापन में मांग की गई है कि आशा एवं पर्यवेक्षकों को प्रत्येक माह की 5 तारीख तक बिना किसी कटौती के नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही वेतन भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था लागू करते हुए वेतन पर्ची उपलब्ध कराई जाए, जिसमें अर्जित राशि, कटौती और बकाया भुगतान का स्पष्ट उल्लेख हो।
यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि आशा कार्यकर्ताओं से कई बार गैर-विभागीय कार्य कराए जाते हैं, जिनका अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता। आयुष्मान कार्ड निर्माण सहित विभिन्न अभियानों में कार्य करने के बावजूद उचित पारिश्रमिक नहीं मिलने की शिकायतें भी ज्ञापन में दर्ज की गई हैं।
संगठन ने आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम 26 हजार रुपये मासिक वेतन देने, राज्य सरकार की ओर से तत्काल 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय प्रदान करने, रिक्त पदों पर भर्ती करने तथा सेवा समाप्ति संबंधी मामलों में न्यायसंगत प्रक्रिया अपनाने की मांग भी उठाई है।
यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कविता सोलंकी एवं महासचिव पूजा कनौजिया ने कहा कि आशा और आशा पर्यवेक्षक ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, जनजागरूकता और स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, कलेक्टर, सीएमएचओ एवं संबंधित अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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