सुर, लय और लोक रंगों में सिमटा नॉर्थ ईस्ट, यादें छोड़ गया ‘ऑक्टेव’-2026
चार दिवसीय ‘ऑक्टेव 2026’ का समापन, दीया कुमारी बोलीं एक भारत श्रेष्ठ भारत का सर्वोत्तम उदाहरण
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जयपुर। कहीं हिम शेरों की चपल मुद्राओं में हिमालय का लोक जीवन उतरा, कहीं पुंग की थाप पर मणिपुर की आध्यात्मिक ऊर्जा मुखर हुई और कहीं बिहू की उल्लास भरी लय ने असम के बसंत को मंच पर साकार कर दिया। फिर 16 स्वरों ने एक साथ आकार लिया तो नॉर्थ ईस्ट की सांस्कृतिक खुशबू कॉयर सिंगिंग के जरिए सभागार में फैल गई। चार दिनों तक जयपुर को पूर्वोत्तर भारत की कला, संस्कृति और जीवन परंपराओं से रूबरू कराने वाले ‘ऑक्टेव 2026’ ने रविवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में कुछ ऐसे ही रंगों के साथ विदाई ली।
ऑक्टेव ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का सर्वोत्तम उदाहरण : दीया कुमारी
समापन समारोह की मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री, पर्यटन, वित्त एवं संस्कृति मंत्री दीया कुमारी ने कहा कि भारत की वास्तविक सांस्कृतिक शक्ति उसकी विविध लोक परंपराओं, भाषाओं, संगीत, नृत्य, कला और जीवन पद्धतियों में निहित है। पूर्वोत्तर इस विविधता का समृद्ध अध्याय है और ‘ऑक्टेव’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विचार का सर्वोत्तम उदाहरण है। उन्होंने सफल आयोजन के लिए पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक डॉ. आश्विन एम. दलवी को बधाई दी। डॉ. दलवी ने शॉल ओढ़ाकर दीया कुमारी का अभिनंदन किया। आरआईसी के निदेशक एन. सी. गोयल भी मौजूद रहे।
16 कंठों में घुला ‘जय हो’, एकापेला ने बांधा समां
लिपोकमार के निर्देशन में 16 गायकों के कॉयर ने ‘जय हो’ और ‘लाखों हैं यहां दिलवाले’ छेड़ा तो श्रोता भी सुरों के इस सामूहिक प्रवाह में शामिल हो गए। लिपोकमार की रचना ‘मेजेमसांगर नारो’ में फूलों के मुरझाने और फिर खिलने के भावों ने जीवन चक्र को स्वर दिए, जबकि गंगा को समर्पित उनकी रचना ‘तबला’ ने श्रोताओं को भाव विभोर किया। बिना वाद्य संगत के केवल स्वरों से सजी ABBA के लोकप्रिय गीतों की एकापेला मेडली ने खास आकर्षण पैदा किया। उम्मीद, शांति, करुणा और विश्वास का संदेश देती ‘द प्रेयर’ भी असर छोड़ गई। कॉयर ग्रुप और ‘अलोबो नागा एंड द बैंड’ के साथ पारंपरिक और समकालीन संगीत का संगम हुआ तो ऊर्जावान धुनों पर श्रोता भी थिरक उठे।
लोक लयों में साकार हुआ पूर्वोत्तर
अंतिम शाम सिंघी छाम में सिक्किम के हिम शेर मंच पर जीवंत हुए, पुंग चोलम ने मणिपुर की ताल और आध्यात्मिक ऊर्जा का अहसास कराया तो असम के बिहू ने रोंगाली बिहू के उल्लास और बसंत की उमंग को नृत्य में ढाल दिया। ताल, गति, रंग और भावों से सजी इन प्रस्तुतियों के साथ ‘ऑक्टेव 2026’ का पर्दा गिरा, लेकिन पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक छवियां जयपुर के मन में अपनी अनुगूंज छोड़ गईं। मंच संचालन मोहिता दीक्षित और गौरव शर्मा ने किया।
Girwa, Udaipur | Oct 4, 2026