शिशु को जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध ही पिलाएं- सिविल सर्जन
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विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गतआयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम
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जिले में 1 अगस्त से 7 अगस्त 2026 तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री माताओं तथा उनके परिवारजनों को स्तनपान के महत्व और इसके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी जा रही है।
इसी क्रम में जिला चिकित्सालय शहडोल में विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ ने कहा कि मां का दूध नवजात शिशु के लिए सर्वोत्तम, सुरक्षित एवं संपूर्ण आहार है। उन्होंने कहा कि शिशु के जन्म के तुरंत बाद मां का पहला पीला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) अवश्य पिलाया जाना चाहिए। इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शिशु को विभिन्न संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
उन्होंने बताया कि जन्म से छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। इस अवधि में पानी, शहद, घुट्टी अथवा अन्य किसी प्रकार के खाद्य पदार्थ की आवश्यकता नहीं होती। छह माह की आयु पूर्ण होने के बाद स्तनपान के साथ उपयुक्त पूरक आहार प्रारंभ किया जाना चाहिए तथा स्तनपान को दो वर्ष या उससे अधिक समय तक जारी रखा जा सकता है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील हथगेल ने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान सभी लोग स्तनपान के महत्व को समझें और यह सुनिश्चित करने में सहयोग करें कि प्रत्येक नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद मां का पहला दूध मिले तथा जीवन के प्रारंभिक छह माह तक उसे केवल मां का दूध ही उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शिशु और स्वस्थ समाज के निर्माण में स्तनपान की महत्वपूर्ण भूमिका है।
विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत क्विज प्रतियोगिता, रंगोली सहित अन्य जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
कार्यक्रम में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. टी.एन. चतुर्वेदी, डॉ. उमेश नामदेव, चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स, एएनएमटीसी के संकाय सदस्य, छात्र-छात्राएं, एलायंस क्लब के सदस्य, शिवानी पैरामेडिकल के छात्र-छात्राएं तथा एएनसी एवं पीएनसी माताएं उपस्थित रहीं।
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Shahdol, Madhya Pradesh | Aug 4, 2026