बलरामपुर: मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में साधु पासवान पर मुकदमा, हिरासत की कार्रवाई पर सपा कार्यकर्ताओं का विरोध
पुलिस बोली—सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट किए जाने की शिकायत पर हुई कार्रवाई, जांच जारी
सपा नेताओं ने कार्रवाई को बताया विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास, साधु पासवान बोले—वीडियो सपा प्रदेश कार्यालय से जारी हुआ
बलरामपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध कथित रूप से आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने के मामले में बलरामपुर पुलिस ने पूर्व विधायक जगराम पासवान के भाई साधु पासवान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू की है। पुलिस के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वीडियो पोस्ट किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद मामले को संज्ञान में लिया गया।
पुलिस की कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और विरोध दर्ज कराया। सपा नेताओं का आरोप है कि विपक्ष से जुड़े लोगों के खिलाफ सत्ता के दबाव में कार्रवाई की जा रही है और राजनीतिक आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं पूर्व विधायक जगराम पासवान ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे दमनकारी और असंवैधानिक कार्रवाई बताया। उनका कहना है कि विपक्ष के नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराने का प्रयास किया जा रहा है।
दूसरी ओर, साधु पासवान का कहना है कि जिस वीडियो को पुलिस आपत्तिजनक बता रही है, वह वीडियो समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय से जारी किया गया था और उनके अनुसार उसमें कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति जताई है।
पुलिस का क्या कहना है?
अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पाण्डे के अनुसार, साधु पासवान नाम के सोशल मीडिया अकाउंट/प्लेटफॉर्म से एक कथित आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट किए जाने की जानकारी मिली थी। मामले को संज्ञान में लेते हुए संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और वैधानिक प्रक्रिया के तहत जांच एवं कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस का पक्ष है कि कार्रवाई किसी राजनीतिक दल के आधार पर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई सामग्री को लेकर दर्ज मामले के आधार पर की जा रही है। जांच के दौरान वीडियो की प्रकृति, उसके स्रोत और पोस्ट किए जाने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।
सत्ता पक्ष के नजरिये से भी उठ रहा सवाल
सरकार और पुलिस प्रशासन की ओर से लगातार सोशल मीडिया पर भ्रामक, आपत्तिजनक अथवा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली सामग्री के मामले में कानूनी कार्रवाई की बात कही जाती रही है। ऐसे में पुलिस का तर्क है कि सोशल मीडिया पर किसी भी सामग्री को पोस्ट करने से पहले उसकी वैधानिकता और तथ्यात्मकता का ध्यान रखना जरूरी है।
मामले में अब मुख्य सवाल यह है कि विवादित वीडियो वास्तव में किस स्रोत से जारी हुआ, उसे किस अकाउंट से पोस्ट किया गया और उसमें कानूनी रूप से आपत्तिजनक क्या पाया गया। इन बिंदुओं पर पुलिस की जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है, जबकि सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक उत्पीड़न बताया है। मामले में दोनों पक्षों के दावों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
Balrampur, Balrampur | Sep 16, 2026