*दो मिनट की बिजली गुल होते ही प्रशासन हरकत में, जिनका पूरा जीवन अंधेरे में—उनका दर्द कौन सुनेगा?:विवेक पाण्डेय*
सीधी। जिला मुख्यालय से महज करीब 35 किलोमीटर दूर ग्राम शिकरा के वार्ड क्रमांक 17 और 18 में सैकड़ों आदिवासी परिवार आज भी सड़क, बिजली, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर हैं। देश की आजादी के दशकों बाद भी इन परिवारों के जीवन में विकास की रोशनी पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है।
शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पाण्डेय ने कहा कि नेताओं और अधिकारियों के घर-दफ्तर में दो मिनट बिजली गुल होने पर प्रशासन तत्काल हरकत में आ जाता है, लेकिन जिन गरीब आदिवासी परिवारों का पूरा जीवन ही अंधेरे और अभाव में गुजर रहा है, उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। यह स्थिति बेहद दुखद और चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि सत्तापक्ष हो या विपक्ष, जनता को राजनीति नहीं बल्कि अपने मूलभूत अधिकार, सड़क, बिजली, शिक्षा और विकास चाहिए। यदि योजनाओं और बजट के बावजूद धरातल पर सुविधाएं नहीं पहुंच रहीं, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
विवेक पाण्डेय ने कहा कि शिकरा के पीड़ित परिवारों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा और उनके अधिकार एवं सम्मान के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
जहां मौके में शिवसेना जिलाध्यक्ष बेनाम सिंह बघेल उर्फ भोले, नगर अध्यक्ष जैनेंद्र सिंह चौहान उर्फ भोले
व सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे