*विकास की चमक के बीच सड़क को तरसती आदिवासी बस्ती, मनटोलवा–सरहजी टोला की पीड़ा कब सुनेगा प्रशासन?*
गर्भवती महिलाओं को आज भी चारपाई पर ढोने की विवशता, मार्ग के अभाव में ग्रामीणों की जिंदगी दांव पर; कांग्रेस अध्यक्ष *प्रभात द्विवेदी* ने उठाया मूलभूत सुविधा का सवाल
मैहर। विकास के दावों और धरातलीय वास्तविकताओं के बीच की खाई को समझना हो तो ग्राम मनटोलवा के सरहजी टोला की आदिवासी बस्ती की स्थिति पर ध्यान देना पर्याप्त है। *नगर कांग्रेस अध्यक्ष प्रभात दुवेदी* ने कहां कि यहां रहने वाले सेकड़ों आदिवासी परिवारों के लिए आज भी आवगमन का सुगम मार्ग एक अधूरी अकांक्षा बना हुआ है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों का सामान्य जीवन कठिनाइयों से घिरा है वहीं आपातकालीन परिस्थितियों में यह समस्या जीवन मरण का प्रश्न बन जाती है।
ग्रामीणों की व्यथा के अनुसार प्रसव पीड़ा से गुजरने वाली महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए आज भी चारपाई का सहारा लेना पड़ता है। आरोप है कि पूर्व में ऐसी परिस्थितियां भी बनीं जब प्रसव के लिए ले जाई जा रही महिलाएं समय पर बस्ती से बाहर नहीं पहुंच सकीं और उनकी मृत्यु हो गई। ये परिस्थितियां केवल आवागमन की समस्या नहीं बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं प्रशासनिक संवेदनशीलता और बुनियादी नागरिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर सवाल खड़ा करती हैं
इस क्षेत्र के आसपास केजीएस सीमेंट उद्योग और मैहर सीमेंट उद्योग से जुड़ी गतिविधियों के साथ चूना पत्थर का कारोबार भी होता है। ऐसे औद्योगिक परिवेश के निकट स्थित आदिवासी बस्ती में यदि लोगों को आवागमन के लिए सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का इंतजार करना पड़ रहा है, तो यह सरकार के विकास दावो की पोल खोलने जैसा हैं ।
कांग्रेस अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी मौके का निरीक्षण करें मार्ग की वास्तविक स्थिति का आकलन कर निर्माण की जिम्मेदारी तय करें और आवश्यक बजट एवं समयसीमा के संबंध में स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करें।
मनटोलवा के सरहजी टोला के लोगों की अपेक्षा किसी विशेष सुविधा या उपकार की नहीं, बल्कि सुरक्षित आवागमन और सम्मानजनक जीवन की है। सवाल यही है कि जिस दौर में विकास की नई इबारतें लिखी जा रही हैं, उस दौर में आदिवासी परिवारों को सड़क के लिए और कितने समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी?