हमारे ही समाज का है।जहाँ एक मृत महिला के जनाज़े/अर्थी को कंधा देने के लिए पूरे गांव में सिर्फ उसका बाप और भाई ही खड़े हैं।किसी ने कहा मेरे घर शादी है, किसी ने कहा शादी होगी, किसी ने कहा कथा सुनी है—
हमारे ही समाज का है।जहाँ एक मृत महिला के जनाज़े/अर्थी को कंधा देने के लिए पूरे गांव में सिर्फ उसका बाप और भाई ही खड़े हैं।किसी ने कहा मेरे घर शादी है, किसी ने कहा शादी होगी, किसी ने कहा कथा सुनी है— - Shahabad News