श्रीमद्भागवत कथा में सुनाई श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
पंचकूला। 5 सितंबर को सनातन धर्म मंदिर, सेक्टर-10 पंचकूला के पावन प्रांगण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा वाचन करते हुए पूज्या स्वामी डॉ. अमृता दीदी जी ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं से अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि भगवान सर्वसमर्थ होते हुए भी भक्तों की भावना के अनुरूप माधुर्यमयी और मनोहारी लीलाएं करते हैं। भगवान अपनी दिव्य शक्ति को छिपाकर भक्तों के साथ बाल स्वरूप में प्रेम और वात्सल्य का आनंद प्रदान करते हैं।
कथा के दौरान पूतना वध का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि नन्हे कन्हैया ने दूध पीने के बहाने भयंकर राक्षसी पूतना के प्राणों का ही पान कर लिया। इसके बावजूद माता यशोदा के लिए श्रीकृष्ण एक अबोध बालक ही थे। उन्होंने अपने वात्सल्य भाव से कन्हैया की नजर उतारी और उनकी रक्षा की कामना की। भगवान भी माता यशोदा से अपने ऐश्वर्य को छिपाकर रखते थे।
स्वामी डॉ. अमृता दीदी जी ने श्रीकृष्ण की माखन चोरी की लीला का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान गोपियों के घर-घर जाकर उन्हें आनंदित करते और उनके प्रेम से बनाए गए माखन को बड़े प्रेम से ग्रहण करते थे। वहीं कंस द्वारा भेजे गए अनेक असुरों का भगवान ने बाल रूप में ही खेल-खेल में संहार कर उन्हें अपने धाम की प्राप्ति कराई।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सृष्टि निर्माता ब्रह्मा जी और देवराज इंद्र के अज्ञान को भी दूर कर उन्हें अपने सत्य स्वरूप का बोध कराया। श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल धार्मिक कथाएं नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली शिक्षाएं भी हैं।
कथा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि हमें अपनी नदियों, पर्वतों और प्राकृतिक संसाधनों की स्वच्छता एवं संरक्षण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पर्यावरण को सुरक्षित रखकर ही पृथ्वी को हरा-भरा बनाया जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुखद एवं सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
समारोह के दौरान समाजसेवा और पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया। मंदिर सभा की ओर से उन्हें सम्मान प्रदान करते हुए समाज और जनहित के कार्यों में उनके योगदान की सराहना की गई। सम्मान समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी सम्मानित व्यक्तियों का उत्साहवर्धन किया।
मंदिर सभा की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की गई कि वे श्रीमद्भागवत कथा के वाचन एवं श्रवण का आनंद लेने तथा पुण्य के भागी बनने के लिए सपरिवार कार्यक्रम में पहुंचकर आयोजन की शोभा बढ़ाएं। कथा के पश्चात मंदिर सभा की ओर से भंडारे के रूप में प्रसाद की व्यवस्था भी की गई।