रक्षाबंधन पर पेड़-पौधों को बांधी राखी, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
गोपेश्वर। जहां देशभर में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन धूमधाम से मनाया गया, वहीं चमोली जिले के गोपेश्वर में रक्षाबंधन का अनोखा रूप देखने को मिला। यहां लोगों ने पेड़-पौधों को रक्षा सूत्र बांधकर उनके संरक्षण और सुरक्षा का संकल्प लिया। पिछले 13 वर्षों से जारी इस पहल में बच्चों ने भी उत्साह के साथ भागीदारी की।
रक्षाबंधन के अवसर पर गोपेश्वर नगर के विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पौधों को राखी बांधी और उन्हें परिवार के सदस्य की तरह सुरक्षित रखने का संकल्प लिया। पिछले 13 वर्षों से यहां पौधारोपण के साथ ही पौधों के संरक्षण का अभियान चलाया जा रहा है। हर वर्ष रक्षाबंधन के पर्व पर पेड़-पौधों को रक्षा सूत्र बांधकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाता है।
कार्यक्रम में बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजकों ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने का भी अवसर है। बढ़ते प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय बदलावों के बीच पेड़-पौधों का संरक्षण मानव जीवन के लिए बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए यह पहल लगातार जारी रखी जा रही है।
कार्यक्रम के आयोजक मनोज तिवारी ने कहा कि चमोली की पहचान पर्यावरण संरक्षण के आंदोलनों से जुड़ी रही है। यही वह धरती है, जहां गौरा देवी और क्षेत्र की महिलाओं ने जंगलों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन की ऐतिहासिक मिसाल पेश की। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधों को राखी बांधने की पहल उसी पर्यावरणीय चेतना को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
रक्षाबंधन के इस अनोखे आयोजन ने भाई-बहन के रिश्ते के साथ मानव और प्रकृति के रिश्ते को भी मजबूत करने का संदेश दिया। आयोजकों का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य देना है तो पेड़-पौधों की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है, जितना अपने परिवार की रक्षा करना।