हरदोई गूजर में ₹24 लाख का मरघट निर्माण!
जमीन पर निर्माण नहीं, ऑनलाइन रिकॉर्ड में लाखों का भुगतान
रिकॉर्ड में ₹23.28 लाख खर्च, मेरी पंचायत की लोकेशन पर ढांचा तक नहीं दिखने का दावा—एमबी और सत्यापन पर उठे गंभीर सवाल
जनपद जालौन के डकोर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम हरदोई गूजर में सरकारी धन से कराए गए कथित मरघट निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध पंचायत ऑनलाइन रिकॉर्ड में मरघट निर्माण के नाम पर लाखों रुपये का खर्च दर्ज दिखाई दे रहा है, जबकि ग्रामीणों के साथ मौके पर किए गए निरीक्षण में निर्माण कार्य दिखाई नहीं देने का दावा किया गया है। ऐसे में रिकॉर्ड और जमीन की हकीकत के बीच कथित अंतर ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।
ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार Marghat Nirman कार्य की अनुमानित लागत करीब ₹24.36 लाख और व्यय ₹23,28,583 दर्शाया गया है। रिकॉर्ड में कार्य को 4th State Finance Commission से संबंधित बताया गया है। वहीं भुगतान संबंधी उपलब्ध विवरण में KHUSI CONTRACTOR AND SUPPLIERS के नाम से अलग-अलग मदों में भुगतान दर्ज दिखाई देता है।
एक अन्य ऑनलाइन रिकॉर्ड में Antesthi Sthal Nirman Hetu Bhugtan के नाम से ₹4,98,038, ₹3,70,980, ₹58,205, ₹78,844 और ₹3,23,366 जैसी विभिन्न धनराशियों के भुगतान का विवरण दिखाई देता है। इन भुगतानों का वास्तविक आधार क्या है और किस कार्य के एवज में भुगतान किया गया, यह आधिकारिक जांच का विषय है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मरघट निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं तो उसका निर्माण स्थल पर स्वरूप कहां है? ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर मरघट का अपेक्षित निर्माण या ढांचा दिखाई नहीं देता और वहां झाड़ियां तथा झंकार जैसी स्थिति नजर आती है।
मामले में अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या भुगतान से पहले संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था? क्या ग्राम पंचायत स्तर से कार्य का सत्यापन हुआ? क्या माप पुस्तिका (एमबी), बिल-वाउचर और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र उपलब्ध हैं? भुगतान से पहले जियो-टैग फोटो या अन्य तकनीकी माध्यम से कार्य की पुष्टि की गई थी या नहीं? इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।
यह मामला केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि ऑनलाइन रिकॉर्ड और जमीन पर मौजूद वास्तविक स्थिति का आधिकारिक मिलान कराने का है। यदि जांच में रिकॉर्ड में दर्ज भुगतान और मौके पर कार्य की स्थिति में अंतर सामने आता है, तो संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों और भुगतान प्राप्तकर्ता की भूमिका की भी जांच आवश्यक होगी।
अब सवाल जिला प्रशासन से है—क्या मौके पर तकनीकी टीम भेजकर मरघट की नाप-जोख कराई जाएगी? क्या एमबी, बिल-वाउचर और भुगतान रिकॉर्ड की जांच होगी? और यदि सरकारी धन खर्च हुआ है तो उसकी वास्तविकता जनता के सामने कब आएगी?
सरकारी धन जनता की संपत्ति है। इसलिए हरदोई गूजर के इस मामले में रिकॉर्ड बनाम जमीन की हकीकत का निष्पक्ष सत्यापन ही सबसे बड़ा सवाल है। ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी है।
टीम इसके बाद आपको दूसरी लोकेशन पर ग्राउंड 0 की रिपोर्ट
Jalaun, Jalaun | Aug 2, 2026