टाटीझरिया: प्रकृति की गोद से निकला है 'टाटीझरिया' का वजूद: पानी के सोतों और कटीली झाड़ियों से है नामकरण की अनूठी दास्तां
प्रकृति की गोद से निकला है 'टाटीझरिया' का वजूद: पानी के सोतों और कटीली झाड़ियों से है नामकरण की अनूठी दास्तां। दूधमटिया वन की छांव और रसीले गुलाब जामुन के स्वाद के साथ पूरे सूबे में अलग पहचान रखता है यह प्रखंड। बुजुर्गों की जुबानी, इतिहास की कहानी: कभी घने जंगलों के बीच शुद्ध पानी के स्रोतों (झरिया) को पशुओं से बचाने के लिए ग्रामीणों ने घेरी थी 'टाटी'।