Gala Apple को समझना है तो सिर्फ फोटो नहीं, नजर चाहिए।हर Gala एक जैसा नहीं होता। हर Variety का Colour, Size, Shape और यहां तक कि उसकी Skin पर उभरी हुई Lenticel का Size और Pattern भी अलग होता है।इन छोटे-छोटे अंतर को पहचानने के लिए सिर्फ सोशल मीडिया की फोटो देखना काफी नहीं है। इसके लिए बाग में खड़े होकर वर्षों तक Gala को देखना, समझना और परखना पड़ता है।आज सोशल मीडिया पर रोज वीडियो पोस्ट करके कई अलग-अलग Gala Varieties को दिखाया जाता है और कहा जाता है कि “ये तो सब एक जैसा है।”
जबकि हकीकत बिल्कुल अलग है।सिर्फ Gala की एक फोटो या वीडियो देखकर उसे ही Gala की पूरी दुनिया समझाने की कोशिश करना सही नहीं है Gala को समझने के लिए Google का ज्ञान नहीं, धरातल का अनुभव चाहिए।
हमने वर्षों पहले सोशल मीडिया के माध्यम से यह बात बताई थी कि कौन-सी Gala Variety किस गांव, किस ऊंचाई और किस climatic condition में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
लेकिन बाद में हमारी बताई हुई जानकारी को ही उठाकर कुछ लोगों ने खुद को “गुरु” और “विशेषज्ञ” बनाकर बागवानों को सलाह देना शुरू कर दिया।कभी एक बीघा में 1,000 पौधे लगाने का Consultant Model बताया गया।
कभी एक बीघा से ₹13 लाख कमाई के सपने दिखाए गए।
लेकिन खेती और बागवानी में असली परीक्षा कैमरे के सामने नहीं, धरातल पर होती है। आज बागवान खुद देख रहा है कि कौन-सी सलाह जमीन पर सफल हुई और कौन-सी सिर्फ सोशल मीडिया की दुकान तक सीमित रही।
हम किसी को पास या फेल घोषित नहीं कर रहे।
समय, पेड़ और उत्पादन—तीनों अपना परिणाम खुद बताते हैं। एक बात साफ है— बागवानों को सपने दिखाकर पौधे बेचने का यह खेल हमेशा नहीं चल सकता।
जो लोग बिना धरातली अनुभव के बड़े-बड़े दावे करके बागवानों को पौधे लगाने के लिए गुमराह कर रहे हैं, उनकी असलियत भी एक दिन सामने आएगी।
RMS Bakhol की बात सिर्फ फोटो देखकर नहीं, पेड़ देखकर होती है।Variety की पहचान पोस्ट से नहीं, उसके Performanc से होती है। Gala को समझना है तो नजर विकसित करनी पड़ेगी—सिर्फ सोशल मीडिया की बकवास से Gala नहीं समझा जा सकता।