अद्वैतम: शिव पुराण कथा का भव्य एवं दिव्य आयोजन
भगवान शिव से सीखें जीवन प्रबन्धन- पंकज ओझा
शिव परिवार प्रेम, त्याग, सामंजस्य, सह-अस्तित्व एवं परस्पर सम्मान की भावना सिखाता है - पंकज ओझा
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उदयपुर। अद्वैतम: शिव पुराण कथा का भव्य एवं दिव्य वाचन धर्म ध्वजा रक्षक श्री पंकज ओझा द्वारा किया गया। कथा की आयोजक किरण बाला ‘किरन’ ने बताया कि अद्वैतम: शिक्षा, साहित्य एवं संस्कृति को समर्पित संस्था, उदयपुर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने उपस्थित जनमानस को आध्यात्मिक अनुभूति के साथ जीवन-दर्शन की महत्वपूर्ण सीख भी दी। राजस्थान साहित्य अकादमी के सभागार में श्रावण मास के पावन अवसर पर आयोजित इस आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, भक्तगण एवं साहित्य-संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे। कथा के प्रसंगों को जीवन की व्यवहारिक परिस्थितियों से जोड़कर प्रस्तुत किए जाने से श्रद्धालुओं को धर्म के साथ-साथ जीवन को बेहतर ढंग से जीने की प्रेरणा मिली। कथावाचक श्री पंकज ओझा ने शिव पुराण के विभिन्न प्रसंगों का अत्यंत सहज, प्रभावी एवं भावपूर्ण वाचन करते हुए उन्हें वर्तमान जीवन की व्यवहारिक परिस्थितियों से जोड़ा। उन्होंने बताया कि शिव पुराण की कथाएँ केवल धार्मिक आख्यान नहीं हैं, बल्कि इनमें जीवन को संतुलित, संयमित और सार्थक बनाने के अनेक सूत्र निहित हैं। विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने परिवार, कर्तव्य, धैर्य, संयम, आस्था, प्रेम और सकारात्मक जीवन-दृष्टि के महत्व को रेखांकित किया।
संस्थाअध्यक्ष चेतनराज चुंडावत ने बताया कि सभागार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने पूरे मनोयोग एवं श्रद्धा के साथ शिव पुराण कथा का श्रवण किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का जीवन-दर्शन व्यक्ति को विषम परिस्थितियों में भी धैर्य, संतुलन और सहजता बनाए रखने की प्रेरणा देता है। वर्तमान समय में जब परिवार और समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों से गुजर रहे हैं, ऐसे में शिव के आदर्शों को जीवन में उतारना अत्यंत प्रासंगिक है।
कोमल जीनगर ने कहा कि वर्तमान समय में इस प्रकार की कथाएँ अत्यंत प्रासंगिक हैं। आपाधापी भरे जीवन में व्यक्ति अनेक प्रकार के तनावों से गुजर रहा है। ऐसे समय में शिव पुराण के प्रसंग मन को शांति प्रदान करने के साथ-साथ तनाव प्रबंधन और जीवन को संतुलित रखने के व्यावहारिक उपाय भी बताते हैं। इन कथाओं के माध्यम से व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मकता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त करता है।
कथा के मध्य भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ‘शिवोहम्, शिवोहम्’ के भजन पर अनेक श्रद्धालु एवं भक्तगण भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे। वहीं ‘साँसों की माला पे सिमरूँ मैं शिव का नाम’ भजन पर भी श्रद्धालु भक्ति में मगन होकर झूम उठे। दोनों भजनों के दौरान पूरा सभागार शिवभक्ति में डूब गया और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करते दिखाई दिए। वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
शिल्पी चौहान के अनुसार कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया गया। किरण बाला ‘किरन’ के चैनल ‘किरण बाला ‘किरन’ एवं ‘झीलों की नगरी’ चैनल के माध्यम से कथा का सीधा प्रसारण किया गया। आयोजन के दौरान लगभग पाँच हजार दर्शकों ने ऑनलाइन लाइव प्रसारण के माध्यम से शिव पुराण कथा का दर्शन एवं श्रवण किया, जिससे यह आयोजन सभागार की सीमाओं से निकलकर व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचा।
कार्यक्रम के अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी श्री दुर्गेश मेनारिया एवं मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी श्री चंद्रशेखर जोशी उपस्थित रहे। उन्होंने आयोजन को अत्यंत आत्मीय, उपयोगी एवं समयानुकूल बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में भगवान शिव के आदर्शों पर चलने की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए किरण बाला ‘किरन’ ने बताया कि श्रावण मास में आयोजित इस कथा का उद्देश्य भारतीय सनातन परंपरा, धर्म, साहित्य, संस्कृति और जीवन-मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाना रहा। उन्होंने कहा कि कथा के दौरान श्रद्धालु अंत तक भावपूर्वक जुड़े रहे और पूरा कथा स्थल शिवमय वातावरण से आलोकित रहा।
कथा में परीक्षिता, दिव्यकृति, दिव्यश्री चुण्डावत, मांगीलाल कच्छावा, ओमप्रकाश कच्छावा, शारदा देवी, रामेश्वरलाल जिंगर, विनोद जिंगर, राकेश जिंगर, रतन लाल जादरा, निर्मला देवी, शांता देवी, ललित दक, नरेश यादव, प्रकाश तातेड, अशोक जैन मंथन, पुष्कर गुप्तेश्वर, डॉ मनोहर श्री माली, डॉ. अनिल शर्मा, नीरज शर्मा, श्री रतन मोहता, धीरज गंधर्व, आकांक्षा सुवेरिया, जयप्रकाश भटनागर, राजेश मेहता एवं प्रकाश नेभनानी सहित शहर के साहित्य, संस्कृति एवं कला से जुड़े भारी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित रहे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक भव्यता प्रदान की।
समापन अवसर पर श्रद्धालुओं एवं अतिथियों ने प्रसाद ग्रहण किया और आध्यात्मिक आनंद से अभिभूत होकर कथा स्थल से प्रस्थान किया। इस प्रकार यह आयोजन आस्था, अध्यात्म, साहित्य, संस्कृति और जीवन-दर्शन का अद्भुत संगम बनकर सामने आया।
खबर सोर्स:
किरण बाला ‘किरन’
संस्थापक
अद्वैतम: साहित्य, संस्कृति एवं धर्म को समर्पित संस्था
उदयपुर
Girwa, Udaipur | Aug 24, 2026