श्री शिव महापुराण कथा में विद्यार्थियों को मिले संस्कारों के सूत्र, ब्रह्माकुमारी बहन ने दिलाया नशामुक्त भारत का संकल्प, शिव-पार्वती विदाई प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भावुक
शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक
शाहपुरा/शाहपुरा में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के सप्तम दिवस श्रद्धा, संस्कार, राष्ट्रभक्ति और पारिवारिक मूल्यों का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा प्रारंभ होने से पूर्व प्रतिदिन की भांति रुद्राक्ष से निर्मित शिवलिंग का सहस्त्रार्चन एवं भगवान शिव के 1108 पवित्र नामों के साथ विभिन्न पवित्र द्रव्यों से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। श्री नाथ जी भक्त मंडल के सदस्यों ने भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर सुख-समृद्धि एवं विश्व कल्याण की कामना की।
इसके उपरांत आदर्श विद्या मंदिर, शाहपुरा के छात्र-छात्राएं कथा स्थल पहुंचे, जहाँ पूज्य कथा व्यास महाराज श्री ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी का लक्ष्य केवल शिक्षा प्राप्त करना नहीं, बल्कि आदर्श नागरिक बनना होना चाहिए। माता-पिता एवं गुरुजनों के सम्मान, महापुरुषों के जीवन चरित्र, रामायण एवं श्रीमद्भगवद्गीता के अध्ययन तथा अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वामी विवेकानंद, महाराणा प्रताप, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, रानी लक्ष्मीबाई, भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
इसके बाद ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शाहपुरा से पधारी बहन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए नशामुक्त, स्वस्थ एवं विकसित भारत के निर्माण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नशा वर्तमान समय की सबसे बड़ी सामाजिक बुराइयों में से एक है और प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह स्वयं नशे से दूर रहकर अपने परिवार एवं समाज को भी जागरूक करे। इस अवसर पर उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को तन, मन, धन, समय एवं शक्तियों का सदुपयोग करते हुए नशामुक्त, स्वस्थ और विकसित भारत के निर्माण में सकारात्मक योगदान देने का सामूहिक संकल्प भी दिलाया।
कथा प्रवचन में पूज्य महाराज श्री ने शिवनाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या और द्वेष जैसे विकार मनुष्य को ईश्वर से दूर कर देते हैं। भगवान शिव का स्मरण और सत्संग ही जीवन के इन विकारों से मुक्ति का मार्ग है। उन्होंने श्रद्धालुओं से शिवभक्ति, संतोष, सेवा और सदाचार को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
कथा में भगवान शिव एवं माता पार्वती के विवाह उपरांत विदाई प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया। माता मेना और पुत्री पार्वती के अटूट स्नेह, ममता और विरह का भावपूर्ण चित्रण सुनकर कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं। महाराज श्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में बेटी की विदाई केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, संस्कार और परिवार के अटूट संबंधों का प्रतीक है।
पूरे कथा दिवस में वैदिक मंत्रोच्चार, शिवनाम संकीर्तन, भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत वातावरण बना रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का लाभ प्राप्त किया।