झारखंड में सवाल पूछना अब जोखिम भरा होता जा रहा है। हालिया घटनाओं ने दिखाया कि पत्रकारों की आवाज़ दबाने की कोशिश हो रही है। क्या सच बोलना अब गुनाह है? कब तक पत्रकार डर के साए में काम करेंगे? प्रेस की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। अब वक्त है जवाबदेही और कार्रवाई का।