बैंकों के खराब प्रदर्शन पर जिलाधिकारी सख्त, क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो एवं ऋण वितरण में सुधार के दिए निर्देश
पीएमईजीपी एवं पीएमएफएमई योजनाओं के लक्ष्य के अनुरूप ऋण स्वीकृति और वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश
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मुजफ्फरपुर,
18 जून,2026
जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति (DLCC) एवं जिला स्तरीय समीक्षा समिति (DLRC) की बैठक जिला पदाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में आयोजित की गई। बैठक में जिले के विभिन्न बैंकों के क्रेडिट रेशियो, वार्षिक क्रेडिट प्लान, उद्योग विभाग की योजनाओं तथा ऋण वितरण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान जिलाधिकारी ने कई बैंकों के असंतोषजनक प्रदर्शन पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।
बैठक में सर्वप्रथम बैंकों के क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेशियो की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान पाया गया कि कुछ प्रमुख बैंकों का प्रदर्शन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। यूको बैंक का सीडी रेशियो मात्र 36 प्रतिशत, पंजाब नेशनल बैंक का 39 प्रतिशत तथा बैंक ऑफ इंडिया का 57 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसे जिलाधिकारी ने अत्यंत असंतोषजनक बताया।
जिलाधिकारी ने अग्रणी बैंक प्रबंधक को निर्देश दिया कि वे जोनल / डिविजनल हेड को बैंक की वर्तमान स्थिति से अवगत कराएं तथा सीडी रेशियो में सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र की सक्रियता और ऋण वितरण में वृद्धि से ही जिले में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी तथा रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में वार्षिक क्रेडिट प्लान (एसीपी) की भी समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान पाया गया कि कुछ बैंकों का प्रदर्शन अपेक्षा से काफी कम है। इंडियन ओवरसीज बैंक का प्रदर्शन 44 प्रतिशत, यूको बैंक का 48 प्रतिशत तथा केनरा बैंक का 49 प्रतिशत पाया गया। जिलाधिकारी ने इन आंकड़ों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वित्तीय समावेशन और विकास योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप प्रदर्शन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
उन्होंने निर्देश दिया कि जिन बैंकों का प्रदर्शन 60 प्रतिशत से कम है, उनके संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाए तथा आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही बैंक प्रबंधन को ऋण स्वीकृति और वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।
बैठक में उद्योग विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) की भी विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पीएमईजीपी योजना के तहत 82 लाभार्थियों तथा पीएमएफएमई योजना के तहत 615 लाभार्थियों को ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जिलाधिकारी ने सभी बैंक अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्य से अवगत कराते हुए निर्देश दिया कि योजनाओं के पात्र लाभार्थियों के ऋण आवेदन का समयबद्ध निष्पादन किया जाए तथा लक्ष्य के अनुरूप ऋण स्वीकृति एवं वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देने में इन योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।
बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि पीएमईजीपी योजना के अंतर्गत स्वीकृत 82 ऋण तथा पीएमएफएमई योजना के तहत स्वीकृत 134 ऋण का वितरण पिछले वित्तीय वर्ष में नहीं हो सका था। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित बैंक अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन करते हुए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में शीघ्र ऋण वितरण सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न रोजगारोन्मुखी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाना प्रशासन और बैंकिंग संस्थानों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी बैंक अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में गंभीरता से कार्य करने का आह्वान किया।
बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक, विभिन्न बैंकों के क्षेत्रीय एवं शाखा स्तरीय अधिकारी तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बैंकों के प्रदर्शन में सुधार, ऋण वितरण में तेजी तथा सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी विस्तृत चर्चा की गई।
जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन ने अंत में स्पष्ट किया कि जिन बैंकों का प्रदर्शन अपेक्षित स्तर से नीचे है, उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाना होगा। उन्होंने कहा कि जिले के आर्थिक विकास, उद्यमिता प्रोत्साहन और रोजगार सृजन के लिए बैंकिंग क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है तथा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सभी संबंधित संस्थाओं को समन्वित प्रयास करने होंगे।