पंचम दिवस पर अंत भला तो सब भला” विषय पर गुरुदेव ने प्रवचन देते हुए महावीर स्वामी के जीवन से जुड़ी प्रेरक गाथाओं का वर्णन किया। उन्होंने महावीर स्वामी के पूर्व भव, जीव सिंह और मरीचि की कथा का संगीतमय उपदेश के माध्यम से विस्तार से श्रवण कराया। आचार्य ने बताया कि क्रोध, मान, माया और लोभ का त्याग कर आत्मचिंतन, संयम और सम्यक दर्शन अपनाने से ही सच्चा सुख प्राप्त