मरांची में एक ही दिन में दो मौतों से सनसनी: क्या यह हादसा है या सोची-समझी साजिश?
मरांची थाना क्षेत्र के भगत टोला में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब बीते 36 घंटे से लापता रामप्रवेश सिंह का शव झाड़ियों से बरामद हुआ। परिजनों के आवेदन और संदिग्धों के नाम सामने आने के बाद पुलिस अभी जांच आगे बढ़ा ही रही थी कि दोपहर में नेपाल टोला के रंजीत कुमार (पिता- कपिल महतो) की ट्रेन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई।
एक ही दिन में हुई इन दो मौतों ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के दायरे में रंजीत और पुलिस का दावा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रामप्रवेश सिंह की मौत के मामले में रंजीत कुमार की संलिप्तता सामने आई थी और उसे अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया गया था। पुलिस का दावा है कि रंजीत कानून के डर से आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने ही आ रहा था, तभी वह ट्रेन हादसे का शिकार हो गया। हालांकि, पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी से कड़ी जोड़ने में जुटी है।
पत्नी का गंभीर आरोप: "हादसा नहीं, हत्या हुई है"
वहीं दूसरी ओर, मृतक रंजीत कुमार की पत्नी ने पुलिस के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है। उनका कहना है कि थाना अध्यक्ष रोशन कुमार को पूरे मामले की पल-पल की जानकारी थी, फिर भी वे उनके पति की जान नहीं बचा सके। पत्नी का सीधा आरोप है कि यह कोई ट्रेन दुर्घटना या सुसाइड नहीं, बल्कि रंजीत की सोची-समझी साजिश के तहत हत्या की गई है।
अनसुलझे सवाल
इन दो मौतों ने मरांची में कई यक्ष प्रश्न छोड़ दिए हैं—
क्या रामप्रवेश सिंह की हत्या के गहरे राज़ छुपाने के लिए रंजीत को रास्ते से हटा दिया गया?
क्या रंजीत सच में सरेंडर करने आ रहा था या उसे किसी ने मौत के घाट उतारा?
फिलहाल, रामप्रवेश सिंह की मौत की पूरी सच्चाई और रंजीत की रहस्यमयी मौत का सच सामने आना बाकी है। देखने वाली बात यह होगी कि कानून का शिकंजा असली गुनाहगारों तक कब तक पहुंच पाता है।
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Mokameh, Patna | Sep 21, 2026