शस्त्र पूजन केवल अस्त्रों की पूजा नहीं, बल्कि उन शाश्वत आदर्शों का स्मरण है— जहाँ शौर्य को सम्मान, शक्ति को संयम और साहस को कर्तव्य का मार्ग मिलता है।
इन पूर्वजों के शस्त्रों के सम्मुख नमन करते हुए मैं उस युग में पहुँच जाता हूँ, जब तलवार योद्धा की आत्मा का विस्तार होती थी और संकल्प के लिए जीवन भी अर्पित कर दिया जाता था। सम्मान, निष्ठा और अपनी प्रजा की रक्षा— ये केवल कर्तव्य नहीं, पवित्र दायित्व थे।
सिटी पैलेस के ऐतिहासिक प्रांगण में यह अनुष्ठान एक गहरी आध्यात्मिक अनुभूति से भर देता है। चमकते हुए शस्त्र उन वीर अश्वारोहियों और पीढ़ियों की स्मृति जगाते हैं, जिन्होंने साहस, निष्ठा और बलिदान के मार्ग पर जीवन बिताया। उनसे मेरा संबंध केवल वंश परंपरा का नहीं, बल्कि उन आदर्शों के प्रति साझा श्रद्धा का है।
जय एकलिंगजी। 🙏
सौ. लक्ष्यराज सिंह जी की सोशल मीडिया पोस्ट से
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