झारखंड में पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं,ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि छात्रों की मांगों और आंदोलन पर राजनीतिक दलों तथा नेताओं की प्रतिक्रिया इतनी सीमित क्यों दिखाई दे रही है.....?
कई लोग पूछ रहे हैं कि जब युवाओं के भविष्य का सवाल है,तब जिम्मेदार पक्षों से स्पष्ट जवाबदेही कौन तय करेगा?छात्रों के बीच यह भी चर्चा है कि पेपर लीक जैसे मामलों में जांच,कार्रवाई और जवाबदेही की मांग आखिर किसके सामने रखी जाए....?
मुद्दा किसी दल या विचारधारा से बड़ा है,अगर परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं,तो छात्रों को पारदर्शी जांच,दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की ठोस व्यवस्था का अधिकार है......!
युवाओं का सवाल सीधा है—उनकी मेहनत और भविष्य की रक्षा कौन करेगा?