एक तरफ ये बोला जा रहा हम शांतिपूर्ण तरीके से हेमकुंड यात्रा पर जाना चाहते हैं। कर्णप्रयाग की घटना को लेकर इतने दिन से जो तनाव चल रहा उसे आपसी सहमति से खत्म करना चाहते हैं। वहीं दूसरी ओर से वीडियो आ रही है जिसमें निहंग सिखों ने पुलिस के बैरिकेट तोड़े है। हवा में तलवारे और शस्त्र लहरा रहे है। ऐसे दोनों बातें एक साथ कैसे हो सकती? शांतिपूर्ण तरीका इसमें तो कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। उत्तराखंड पुलिस इतनी बेबस क्यों दिखाई पड़ रही है? मुख्यमंत्री जी आपने तो बोला था कानून व्यवस्था से खिलवाड़ ना होने देंगे। ये है कानून व्यवस्था आपके शासन/प्रशासन की क्या?