फेसबुक दर्शकों के सवाल पर सामने आया पूरा पुलिस रिकॉर्ड—अमित उर्फ अतुल जैन के विरुद्ध दर्ज 13 आपराधिक प्रकरणों का विवरण
देवेन्द्रनगर। हाल ही में देवेन्द्रनगर में जमीन संबंधी विवाद को लेकर मारपीट की घटना सामने आने के बाद फेसबुक पर कई दर्शकों ने मामले की पूरी पृष्ठभूमि और आरोपी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड के संबंध में जानकारी जानने का प्रयास किया था। इसी क्रम में थाना देवेन्द्रनगर के थाना प्रभारी उनि. संतोष सिंह यादव द्वारा साझा की गई पुलिस रिकॉर्ड संबंधी जानकारी के आधार पर यह विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, 6 सितंबर 2026 को फरियादी सौरभ जैन ने अपने भाइयों सोहित जैन और सोभित जैन के साथ थाना देवेन्द्रनगर पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। फरियादी के अनुसार जमीन संबंधी विवाद को लेकर अमित जैन से पुरानी रंजिश चल रही थी। आरोप है कि अमित जैन दुकान में पहुंचा और विवाद के दौरान मारपीट की गई, जिसमें सौरभ जैन के सिर तथा उनके भाई सोहित के हाथ में चोट लगने की बात रिपोर्ट में दर्ज है। सोभित जैन के साथ भी मारपीट किए जाने और धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
अब जानिए पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज पुराने प्रकरणों का पूरा विवरण
थाना प्रभारी संतोष सिंह यादव द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार अमित उर्फ अतुल जैन के विरुद्ध कुल 13 आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध बताए गए हैं। इन प्रकरणों में अलग-अलग समय पर मारपीट, गाली-गलौज, धमकी, सड़क दुर्घटना, शासकीय कार्य में बाधा, जुआ, अपहरण सहित विभिन्न धाराओं के मामले शामिल हैं।
1. अपराध क्रमांक 138/2003
धारा 323, 294, 506, 34 भादवि के तहत प्रकरण पंजीबद्ध बताया गया है। इसमें मारपीट, गाली-गलौज और धमकी से संबंधित धाराएं शामिल हैं।
2. अपराध क्रमांक 155/2004
धारा 341, 323, 324, 506, 34 भादवि के तहत मामला दर्ज बताया गया है। इसमें रास्ता रोकने, मारपीट, हथियार से चोट पहुंचाने और धमकी से संबंधित धाराएं शामिल हैं।
3. अपराध क्रमांक 80/2004
धारा 279, 337, 338, 427 भादवि के तहत मामला पंजीबद्ध बताया गया है। यह प्रकरण वाहन चलाने में लापरवाही, दुर्घटना में चोट तथा संपत्ति को नुकसान से संबंधित धाराओं वाला है।
4. अपराध क्रमांक 196/2005
धारा 294, 341, 506बी भादवि के तहत प्रकरण दर्ज बताया गया है। इसमें गाली-गलौज, रास्ता रोकने और धमकी से संबंधित धाराएं शामिल हैं।
5. अपराध क्रमांक 148/2006
धारा 353, 294, 147, 149, 325 भादवि के तहत मामला दर्ज बताया गया है। इसमें शासकीय कार्य में बाधा, गाली-गलौज, बलवा/समूह से संबंधित धाराएं तथा गंभीर चोट से संबंधित धारा शामिल है।
6. अपराध क्रमांक 149/2006
धारा 341, 294, 353, 147, 149, 427 भादवि के तहत प्रकरण पंजीबद्ध बताया गया है। इसमें रास्ता रोकने, गाली-गलौज, शासकीय कार्य में बाधा, बलवा तथा संपत्ति को नुकसान से संबंधित धाराएं हैं।
7. अपराध क्रमांक 203/2006
धारा 363, 366, 376 भादवि तथा धारा 3(1-12) एससी/एसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज बताया गया है। पुलिस रिकॉर्ड में यह प्रकरण अपहरण, महिला को ले जाने/विवाह आदि के लिए विवश करने तथा बलात्कार से संबंधित धाराओं के साथ दर्ज होना बताया गया है।
8. अपराध क्रमांक 210/2012
धारा 13 जुआ एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध बताया गया है।
9. अपराध क्रमांक 213/2010
धारा 13 जुआ एक्ट के तहत एक अन्य प्रकरण दर्ज बताया गया है।
10. अपराध क्रमांक 91/2006
धारा 294, 323, 506बी भादवि के तहत मामला दर्ज बताया गया है। इसमें गाली-गलौज, मारपीट और धमकी से संबंधित धाराएं शामिल हैं।
11. अपराध क्रमांक 218/2015
धारा 341, 294, 386, 506 भादवि के तहत प्रकरण पंजीबद्ध बताया गया है। इसमें रास्ता रोकने, गाली-गलौज, जबरन वसूली/उगाही से संबंधित धारा तथा धमकी की धारा शामिल है।
12. अपराध क्रमांक 302/2026
धारा 115(2), 296(b), 351(3) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज बताया गया है।
13. अपराध क्रमांक 419/2026
धारा 115(2), 296(b), 333, 351(3) बीएनएस के तहत एक अन्य प्रकरण पंजीबद्ध होना पुलिस रिकॉर्ड में बताया गया है।
16 प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के प्रकरण भी दर्ज
थाना प्रभारी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, उपरोक्त 13 आपराधिक प्रकरणों के अलावा आरोपी के विरुद्ध कुल 16 प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के प्रकरण भी दर्ज बताए गए हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2006 में अमित उर्फ अतुल जैन का नाम थाना की गुंडा सूची में भी दर्ज किया गया था।
क्यों सामने लाई गई यह जानकारी?
फेसबुक पर कुछ दर्शकों ने सवाल किया था कि देवेन्द्रनगर की हालिया घटना के पीछे क्या पूरा विवाद है और संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं। इसी सवाल के जवाब में थाना देवेन्द्रनगर के थाना प्रभारी उनि. संतोष सिंह यादव द्वारा साझा की गई पुलिस रिकॉर्ड संबंधी जानकारी के आधार पर यह विवरण सामने रखा जा रहा है।
यह पोस्ट किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज प्रकरणों की जानकारी दर्शकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से है।
महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण: किसी व्यक्ति के विरुद्ध FIR अथवा आपराधिक प्रकरण दर्ज होना अपने आप में अपराध सिद्ध होना नहीं है। प्रत्येक मामले का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया और निर्णय के अधीन होता है। संबंधित व्यक्ति/पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।
संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी निष्पक्षता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।
स्रोत: थाना देवेन्द्रनगर के थाना प्रभारी उनि. संतोष सिंह यादव द्वारा साझा की गई पुलिस रिकॉर्ड संबंधी जानकारी।