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एच ए एस अधिकारियों के तबादले

Dharamshala, Kangra | Jul 10, 2026

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आईएएस अधिकारियों के तबादले

आईएएस अधिकारियों के तबादले

Dharamshala, Kangra | Jul 10, 2026

मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू ने कुसवाड़ में सुनीं जनसमस्याएं

मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू ने कुसवाड़ में सुनीं जनसमस्याएं

Dharamshala, Kangra | Jul 10, 2026

जयपुर: 7 लाख में विधवा मां की सुपारी, सरकारी नौकरी और करोड़ों की जायदाद के लिए 24 वर्षीय बेटी आयुषी ने करवाई हत्या ।

130 की रफ्तार से आती स्कॉर्पियो ने महिला को कुचल डाला जिससे महिला की मौत हो गई । पहली नजर में यह साधारण हिट-एंड-रन केस था, लेकिन जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो होश उड़ गए । वह कोई हादसा नहीं, बल्कि तीन महीने से बुना जा रहा सगी बेटी का खौफनाक जाल था । जयपुर के प्रताप नगर इलाके में एक 24 साल की सगी बेटी ने अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी और करोरों रुपये की संपत्ति हड़पने के लिए अपनी ही विधवा मां की 7 लाख रुपये की सुपारी देकर बेरहमी से हत्या करवा दी । वकालत की तैयारी कर रही बेटी आयुषी शर्मा ने इस पूरी वारदात को एक सामान्य 'हिट-एंड-रन' सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की पैनी नजर और सीसीटीवी फुटेज ने इस रूह कंपा देने वाली साजिश का पर्दाफाश कर दिया । पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी आयुषी शर्मा अपनी मां नीरज शर्मा की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी पाना चाहती थी । आयुषी के पिता विजय कुमार शर्मा कोर्ट में लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) थे, जिनकी एक साल पहले मौत हो गई थी । उनकी जगह मां नीरज शर्मा को अनुकंपा पर नौकरी मिली थी । आयुषी खुद यह नौकरी करना चाहती थी और वह अपनी मां को अपना भविष्य बर्बाद करने का जिम्मेदार मानती थी । इसके अलावा, नीरज शर्मा के नाम पर जयपुर में करीब 4 करोड़ रुपये के दो मकान और भरतपुर हाईवे पर करीब 10 करोड़ रुपये की पांच बीघा कीमती जमीन थी, जिसे आयुषी और उसके जेठ पक्ष के रिश्तेदार हड़पना चाहते थे । डीसीपी रंजिता शर्मा के मुताबिक, इस खौफनाक हत्याकांड की साजिश करीब तीन महीने पहले से रची जा रही थी । आयुषी ने इस साजिश में अपने ताऊ मोहन स्वरूप और चचेरे भाई बलराम उर्फ रवि को शामिल किया । उन्होंने बयाना के रहने वाले हेमंत शर्मा को 7 लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या का ठेका दिया । हेमंत ने इस काम के लिए अपने चार अन्य साथियों आकाश शर्मा, अरविंद शर्मा, मोहित शर्मा और रोहित जाटव को साथ मिलाया । 3 जुलाई 2026 की शाम करीब 4:45 बजे, जब नीरज शर्मा अपने दिव्यांग बेटे को कोचिंग क्लास छोड़कर पैदल घर लौट रही थीं, तभी पूरी प्लानिंग के तहत आरोपियों ने एक हरियाणा नंबर की सफेद स्कॉर्पियो से उन्हें टक्कर मार दी । गाड़ी की रफ्तार करीब 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा थी । टक्कर इतनी जोरदार थी कि नीरज शर्मा हवा में उछलकर करीब 100 फीट दूर जा गिरीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई । वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी गाड़ी को चौपाटी के पास लावारिस छोड़कर बाइक से फरार हो गए । गाड़ी की नंबर प्लेट पर मिट्टी पुती हुई थी ताकि उसकी पहचान छुपाई जा सके ।
प्रताप नगर थाना पुलिस को शुरुआत में यह एक सामान्य सड़क हादसा लग रहा था । लेकिन जब मृतका के भाई राकेश कुमार शर्मा ने अपनी भांजी आयुषी, सास और भतीजे बलराम पर प्रॉपर्टी के विवाद और हत्या की आशंका जताते हुए शिकायत दर्ज कराई, तो जांच का रुख बदल गया । पुलिस ने जब घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो सच सामने आ गया । फुटेज में साफ दिखा कि सड़क पूरी तरह खाली थी, गाड़ी और महिला की दिशा विपरीत थी और ओवरटेक जैसी कोई स्थिति नहीं थी । एक अन्य फुटेज में वही स्कॉर्पियो महिला की रेकी करती हुई नजर आई, जिससे साफ हो गया कि यह एक्सीडेंट नहीं बल्कि सोची-समझी मर्डर मिस्ट्री है ।

जयपुर: 7 लाख में विधवा मां की सुपारी, सरकारी नौकरी और करोड़ों की जायदाद के लिए 24 वर्षीय बेटी आयुषी ने करवाई हत्या । 130 की रफ्तार से आती स्कॉर्पियो ने महिला को कुचल डाला जिससे महिला की मौत हो गई । पहली नजर में यह साधारण हिट-एंड-रन केस था, लेकिन जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो होश उड़ गए । वह कोई हादसा नहीं, बल्कि तीन महीने से बुना जा रहा सगी बेटी का खौफनाक जाल था । जयपुर के प्रताप नगर इलाके में एक 24 साल की सगी बेटी ने अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी और करोरों रुपये की संपत्ति हड़पने के लिए अपनी ही विधवा मां की 7 लाख रुपये की सुपारी देकर बेरहमी से हत्या करवा दी । वकालत की तैयारी कर रही बेटी आयुषी शर्मा ने इस पूरी वारदात को एक सामान्य 'हिट-एंड-रन' सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की पैनी नजर और सीसीटीवी फुटेज ने इस रूह कंपा देने वाली साजिश का पर्दाफाश कर दिया । पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी आयुषी शर्मा अपनी मां नीरज शर्मा की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी पाना चाहती थी । आयुषी के पिता विजय कुमार शर्मा कोर्ट में लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) थे, जिनकी एक साल पहले मौत हो गई थी । उनकी जगह मां नीरज शर्मा को अनुकंपा पर नौकरी मिली थी । आयुषी खुद यह नौकरी करना चाहती थी और वह अपनी मां को अपना भविष्य बर्बाद करने का जिम्मेदार मानती थी । इसके अलावा, नीरज शर्मा के नाम पर जयपुर में करीब 4 करोड़ रुपये के दो मकान और भरतपुर हाईवे पर करीब 10 करोड़ रुपये की पांच बीघा कीमती जमीन थी, जिसे आयुषी और उसके जेठ पक्ष के रिश्तेदार हड़पना चाहते थे । डीसीपी रंजिता शर्मा के मुताबिक, इस खौफनाक हत्याकांड की साजिश करीब तीन महीने पहले से रची जा रही थी । आयुषी ने इस साजिश में अपने ताऊ मोहन स्वरूप और चचेरे भाई बलराम उर्फ रवि को शामिल किया । उन्होंने बयाना के रहने वाले हेमंत शर्मा को 7 लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या का ठेका दिया । हेमंत ने इस काम के लिए अपने चार अन्य साथियों आकाश शर्मा, अरविंद शर्मा, मोहित शर्मा और रोहित जाटव को साथ मिलाया । 3 जुलाई 2026 की शाम करीब 4:45 बजे, जब नीरज शर्मा अपने दिव्यांग बेटे को कोचिंग क्लास छोड़कर पैदल घर लौट रही थीं, तभी पूरी प्लानिंग के तहत आरोपियों ने एक हरियाणा नंबर की सफेद स्कॉर्पियो से उन्हें टक्कर मार दी । गाड़ी की रफ्तार करीब 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा थी । टक्कर इतनी जोरदार थी कि नीरज शर्मा हवा में उछलकर करीब 100 फीट दूर जा गिरीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई । वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी गाड़ी को चौपाटी के पास लावारिस छोड़कर बाइक से फरार हो गए । गाड़ी की नंबर प्लेट पर मिट्टी पुती हुई थी ताकि उसकी पहचान छुपाई जा सके । प्रताप नगर थाना पुलिस को शुरुआत में यह एक सामान्य सड़क हादसा लग रहा था । लेकिन जब मृतका के भाई राकेश कुमार शर्मा ने अपनी भांजी आयुषी, सास और भतीजे बलराम पर प्रॉपर्टी के विवाद और हत्या की आशंका जताते हुए शिकायत दर्ज कराई, तो जांच का रुख बदल गया । पुलिस ने जब घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो सच सामने आ गया । फुटेज में साफ दिखा कि सड़क पूरी तरह खाली थी, गाड़ी और महिला की दिशा विपरीत थी और ओवरटेक जैसी कोई स्थिति नहीं थी । एक अन्य फुटेज में वही स्कॉर्पियो महिला की रेकी करती हुई नजर आई, जिससे साफ हो गया कि यह एक्सीडेंट नहीं बल्कि सोची-समझी मर्डर मिस्ट्री है ।

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