जनजातीय संस्कृति के संरक्षण हेतु शोधकर्ताओं ने किया गोंड समाज की परंपराओं का अध्ययन
चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम), झारखंड।
आज मनोहरपुर विधानसभा अंतर्गत गोईलकेरा प्रखंड के ग्राम भरडीहा में अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ की एक औपचारिक बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर जनजाति शोध संस्थान, रांची से आए चार सदस्यीय शोधकर्ता दल ने प्रातः 10:00 बजे से संध्या 4:30 बजे तक गोंड समाज की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक पूजन परंपरा, पारंपरिक वेशभूषा, खान-पान एवं सामाजिक रीति-रिवाजों पर विस्तृत अध्ययन एवं शोध कार्य किया।
शोध के दौरान अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ के प्रदेश महासचिव श्री लक्ष्मण नायक ने शोधकर्ताओं को गोंड समाज की परंपराओं, संस्कृति एवं धार्मिक मान्यताओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने जन्म से लेकर मृत्यु संस्कार तक की संपूर्ण गोंडी परंपरा, सामाजिक व्यवस्था, प्राकृतिक पूजा पद्धति एवं सांस्कृतिक विरासत का विस्तृत वर्णन करते हुए समाज की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान से शोधकर्ताओं को अवगत कराया।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सह जिला अध्यक्ष श्री गुरुचरण नायक के नेतृत्व में समाज के अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। इनमें श्री जगदीश नायक, श्री बलवंत नायक, श्री मंगलमय नायक, श्री रुद्र प्रताप नायक, श्री मोतीलाल नायक, श्री परीक्षित नायक, श्री अक्षय नायक, श्री सुधांशु नायक, श्री शिवरतन नायक, श्री अखिलंदर नायक, श्री बृजमोहन नायक, क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री मनोज नायक, श्री हिमांशु नायक, श्री बसंत नायक, श्री नंदलाल नायक, श्री जयद्रथ नायक, श्री शैलेश नायक, श्री रमेश नायक सहित समाज के अनेक बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।
महिला प्रतिनिधियों में श्रीमती तरंगिणी नायक, श्रीमती सेबाती नायक एवं श्रीमती दीपा नायक की भी सक्रिय सहभागिता रही।
बैठक में समाज की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण तथा आने वाली पीढ़ियों तक गोंड संस्कृति को सुरक्षित पहुंचाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। शोधकर्ताओं ने समाज के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अध्ययन जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और उसके व्यापक प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
— केदारनाथ नायक
जिला मीडिया प्रभारी, चक्रधरपुर