#मंदसौर जिला अस्पताल बदहाल: फीमेल मेडिकल वार्ड में एक बेड पर दो मरीज भर्ती, स्टाफ की कमी से बढ़ी परेशानी
मंदसौर। जिले के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आए दिन चोरी, विवाद और अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में रहने वाले जिला अस्पताल के फीमेल मेडिकल वार्ड की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के बावजूद पर्याप्त बेड और स्टाफ की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों एवं उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार फीमेल मेडिकल वार्ड में क्षमता से अधिक मरीज भर्ती होने के कारण एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को रखा जा रहा है। इससे मरीजों को आराम मिलने के बजाय असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि वार्ड में जगह की कमी के चलते मरीजों को उचित सुविधा नहीं मिल पा रही है।
परिजनों ने बताया कि वार्ड में बड़ी संख्या में मरीज भर्ती हैं, लेकिन उनकी देखरेख के लिए केवल दो नर्सों का स्टाफ मौजूद है। ऐसे में मरीजों को समय पर दवा देने, नियमित जांच करने और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में कठिनाई हो रही है। कई बार मरीजों और उनके परिजनों को घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।
वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दिखाई देती है। मरीजों की बढ़ती संख्या के मुकाबले न तो पर्याप्त बेड उपलब्ध हैं और न ही पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था है। इसका सीधा असर उपचार व्यवस्था पर पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल पूरे जिले के मरीजों का प्रमुख उपचार केंद्र है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल में पर्याप्त संसाधन और स्टाफ उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो मरीजों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
मरीजों और उनके परिजनों ने जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि फीमेल मेडिकल वार्ड में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की जाए तथा नर्सिंग स्टाफ की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
अब देखना होगा कि जिला अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर क्या कदम उठाते हैं और मरीजों को राहत दिलाने के लिए कब तक व्यवस्थाओं में सुधार किया जाता है।