₹8,000 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य से पांगी में जौ बनी किसानों की पहली पसंद
152 किसानों ने 362 क्विंटल प्राकृतिक जौ की सरकारी खरीद के लिए कराया पंजीकरण, 2025 में 34 किसानों ने बेची थी 99.74 क्विंटल उपज
Pangi Live News चंबा, 18 सितंबर 2026
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती से उत्पादित जौ का समर्थन मूल्य बढ़ाकर ₹8,000 प्रति क्विंटल किए जाने के बाद जनजातीय उपमंडल पांगी घाटी में जौ की खेती किसानों की पहली पसंद बनती नजर आ रही है। इस वर्ष घाटी के 152 किसानों ने 362 क्विंटल जौ को सरकारी समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए कृषि विभाग के पास पंजीकरण करवाया है।
पंजीकरण की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर 2026 है और विभाग के अनुसार इस अवधि तक सरकारी खरीद के लिए पंजीकृत जौ की मात्रा लगभग 400 क्विंटल तक पहुंचने की संभावना है।
2025 में 34 किसानों ने बेची थी 99.74 क्विंटल जौ
प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत वर्ष 2025 में पांगी घाटी के 34 किसानों ने 99.74 क्विंटल प्राकृतिक जौ निर्धारित समर्थन मूल्य ₹6,000 प्रति क्विंटल की दर से बेची थी। इसके एवज में किसानों को सरकार की ओर से ₹5,98,440 का भुगतान किया गया।
वर्तमान में प्राकृतिक खेती से उत्पादित जौ का समर्थन मूल्य बढ़ाकर ₹8,000 प्रति क्विंटल किए जाने से किसानों में जौ की खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है।
पांगी को घोषित किया गया प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 15 अप्रैल 2025 को जिला चंबा के जनजातीय उपमंडल पांगी को प्रदेश का प्रथम प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किया था।
इसके बाद प्राकृतिक खेती से तैयार कृषि उत्पादों को बेहतर एवं लाभकारी मूल्य उपलब्ध करवाने की दिशा में विभिन्न कदम उठाए गए। सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती से उत्पादित जौ की खरीद का समर्थन मूल्य ₹60 प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर अब ₹80 प्रति किलोग्राम किया गया है।
सरकार का कहना है कि समर्थन मूल्य मिलने से किसानों को पारंपरिक कृषि पद्धतियों से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन मिल रहा है।
चार गुना तक बढ़ सकती है सरकारी खरीद
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में जहां 34 किसानों से 99.74 क्विंटल जौ की खरीद हुई थी, वहीं वर्ष 2026 में अब तक 152 किसानों ने 362 क्विंटल जौ की सरकारी खरीद के लिए पंजीकरण करवाया है।
पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस वर्ष सरकारी खरीद लगभग 400 क्विंटल तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इससे पिछले वर्ष की तुलना में सरकारी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
किसानों ने सरकार की पहल का किया स्वागत
पांगी घाटी की ग्राम पंचायत सुराल के किसान राम कुमार और राकेश कुमार, ग्राम पंचायत हुड़ान के किसान शेर सिंह तथा चस्क भटोरी के किसान चैन सिंह ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया है।
किसानों के अनुसार पहले जौ की फसल को कम कीमत पर बेचने की मजबूरी रहती थी, जिससे कई बार खेती में लगी मेहनत और लागत निकालना भी मुश्किल होता था। किसानों का कहना है कि पांगी को प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किए जाने के बाद कृषि विभाग की ओर से उन्हें प्राकृतिक खेती को लेकर मार्गदर्शन मिल रहा है।
उनके अनुसार बेहतर समर्थन मूल्य मिलने के कारण अब घाटी में कई किसान मटर और आलू जैसी नकदी फसलों के साथ-साथ जौ की खेती को भी आर्थिक रूप से लाभकारी विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।
सभी 19 पंचायतों में जागरूकता शिविर
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग द्वारा पिछले करीब डेढ़ वर्ष में पांगी घाटी की सभी 19 ग्राम पंचायतों में जागरूकता शिविर आयोजित किए गए हैं।
इन एक दिवसीय शिविरों में किसानों को प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाले घटकों, प्राकृतिक विधि से तैयार फसलों में होने वाले रोगों तथा उनकी रोकथाम के उपायों की जानकारी दी गई।
कृषि लागत कम करने के उद्देश्य से विभाग की ओर से किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर कृषि यंत्र भी उपलब्ध करवाए गए हैं।
प्राकृतिक सेब को भी मिलेगी विशेष पहचान
पांगी में प्राकृतिक खेती से तैयार सेब की पैदावार को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान पर ‘पांगी एप्पल’ लिखित सेब की पेटियां भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य पांगी के प्राकृतिक सेब को अलग पहचान दिलाने के साथ किसानों को बेहतर बाजार मूल्य उपलब्ध करवाना है।
इन प्राकृतिक उत्पादों पर समर्थन मूल्य
प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती से उत्पादित विभिन्न कृषि उत्पादों के लिए समर्थन मूल्य निर्धारित किए हैं—
- 🌽 मक्की — ₹50 प्रति किलोग्राम
- 🌾 गेहूं — ₹80 प्रति किलोग्राम
- 🌾 जौ — ₹80 प्रति किलोग्राम
- 🟡 कच्ची हल्दी — ₹150 प्रति किलोग्राम
- 🫚 अदरक — ₹30 प्रति किलोग्राम
सरकार के अनुसार समर्थन मूल्य निर्धारित करने का उद्देश्य प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य उपलब्ध करवाना तथा बिचौलियों पर निर्भरता कम करना है।
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Chamba, Chamba | Sep 18, 2026