जनपद के श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मुकदमे की विवेचना कर रहे दरोगा और अभियुक्तों की कथित मिलीभगत से पांच ग्रामीणों को फर्जी तरीके से गवाह बनाने का मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि विवेचक ने जालसाजों से अनुचित लाभ लेकर बिना किसी निष्पक्ष जांच के मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी है। ग्राम बसवार के पांच अलग-अलग लोगों को इस मुकदमे में उनकी जानकारी के बिना गवाह बना लिया गया। आरोप है कि उनके फर्जी हस्ताक्षर कराए गए और जो लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं, उनके जबरन अंगूठे के निशान लगवाए गए।
वादी श्याम नारायण तिवारी का कहना है कि महाराजगंज और कुशीनगर में स्थित उनकी पैतृक जमीन पर पटिदारों व अन्य लोगों ने साठगांठ कर फर्जी तरीके से अपना नाम दर्ज करा लिया है,जिसके चलते उनका पूरा परिवार भूमिहीन होने की कगार पर पहुंच गया है। श्याम नारायन तिवारी ने बताया कि श्यामदेउरवा थाने में तैनात दरोगा व विवेचक आलोक कुमार राय ने आरोपियों से सांठगांठ कर बिना उचित पड़ताल के ही मामले को रफा-दफा करने के लिए फाइनल रिपोर्ट लगा दी। न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुआ था मुकदमा न्याय के लिए वादी ने लगभग एक साल तक मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) और पुलिस के कई उच्च अधिकारियों के चक्कर काटे,लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित ने माननीय न्यायालय की शरण ली, जिसके निर्देश पर यह मुकदमा दर्ज किया गया था।एक वर्ष से न्याय के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटाने के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई,तो पीड़ित परिवार ने अब उच्चाधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी विवेचक और जालसाजों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है
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