पति के नाम से थी पहचान... आज अपने हुनर से बनीं 'लखपति दीदी'
आजीविका मिशन ने बदली टीना बागवान की जिंदगी, फूलों की खुशबू से महका आत्मनिर्भरता का सफर
देवास। कभी अपनी अलग पहचान बनाने का आत्मविश्वास भी नहीं था। लोग उन्हें केवल उनके पति के नाम से जानते थे। परिवार की आय सीमित थी और खेती के भरोसे घर चलाना मुश्किल हो रहा था। लेकिन एक सही अवसर और मजबूत इरादे ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी।
यह कहानी है सोनकच्छ विकासखंड के ग्राम गंधर्वपुरी की रहने वाली श्रीमती टीना बागवान की, जिन्होंने मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर अपनी पहचान खुद बनाई और आज आत्मनिर्भर महिला के रूप में दूसरे परिवारों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
साल 2021 में आजीविका मिशन के प्रशिक्षण से प्रेरित होकर टीना बागवान ने लक्ष्मी आजीविका समूह का गठन किया। समूह से मिले पहले 20 हजार रुपये के ऋण से उन्होंने फूलों की खेती शुरू की और फूलमालाएं बनाना प्रारंभ किया। मेहनत रंग लाई तो मिशन के सहयोग से 40 हजार रुपये की सीसीएल राशि मिली, जिससे उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया।
धीरे-धीरे उनका छोटा प्रयास एक सफल उद्यम में बदल गया। आज उनका परिवार केवल फूल और फूलमालाएं ही नहीं बनाता, बल्कि शादी-विवाह, धार्मिक आयोजनों और अन्य कार्यक्रमों में फूल सजावट, डेकोरेशन और मारुति वैन से पुष्प वर्षा जैसी सेवाएं भी उपलब्ध करा रहा है।
आज टीना बागवान अपने इस व्यवसाय से हर महीने 12 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ परिवार का जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है और सबसे बड़ी बात यह कि अब उनकी पहचान किसी के नाम से नहीं, बल्कि अपने काम और मेहनत से है।
टीना बागवान का सपना अपने फूल एवं फूलमाला व्यवसाय को और बड़े स्तर पर ले जाना है। उनका लक्ष्य "लखपति दीदी" के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत करना है। वे गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
यह कहानी बताती है कि जब महिलाओं को सही मार्गदर्शन, अवसर और आत्मविश्वास मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार की तस्वीर बदलती हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाती हैं।