दिल्ली विरोध प्रदर्शन में जाने से रोकने के लिए आज सुबह 7 बजे से फरीदाबाद पुलिस ने मुझे जबरन हाउस अरेस्ट कर रखा है। अब किसी ज़रूरी काम से बाहर निकलने की कोशिश करने पर भी पुलिस कह रही है कि वे गाड़ी में मेरे साथ चलेंगे।
मेरी निकलने की कोशिशें लगातार जारी रहेंगी।
"सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-क़ातिल में है।"
आख़िर फरीदाबाद प्रशासन का स्तर क्यों गिरता जा रहा है? दिल्ली जाने से रोकने के लिए मेरे घर पर पुलिस का पहरा लगा दिया गया है। लोकतंत्र में सवाल पूछना और शांतिपूर्ण विरोध करना कोई अपराध नहीं है। जनता की आवाज़ को रोकने के बजाय उसकी बात सुनी जानी चाहिए।