सागर सिर्फ़ नाम के सागर नहीं थे, सेवा और समर्पण के भी सागर थे। टिकारी प्रखंड ही नहीं, बल्कि पूरे गया ज़िले में 35 बार से भी ज़्यादा बार रक्तदान (Blood Donation) करने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने वाले सागर भाई पहले ऐसे इंसान थे, जिन्होंने अनगिनत मासूम ज़िंदगियों को नया जीवन दिया। सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनका नाम हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगा और वे हम सभी के दिलों में हमेशा अमर रहेंगे।
व्यक्तिगत रूप से यह क्षति मेरे लिए एक ऐसा दर्द है जिसे शब्दों में बयान कर पाना असंभव है। मैंने सिर्फ़ एक समाजसेवी या जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि अपना एक बेहद प्यारा और सच्चा बड़ा भाई खो दिया है। पिछले 4-5 सालों से जब से उनसे दोस्ती हुई थी, वे एक अलग ही विचार और ऊँचे व्यक्तित्व के इंसान लगे।
उनकी सबसे बड़ी बात यह थी कि वे हर पल एक गार्जियन और सच्चे दोस्त की तरह साथ खड़े रहते थे। जीवन में कहीं भी थोड़ा सा भटकता था, तो तुरंत उनका फोन आ जाता था। कोई भी बात हो, कोई भी स्थिति हो, फोन करके सही राह दिखाना और याद दिलाते रहना उनका अपनापन था। आज यह विश्वास करना बेहद कठिन और दर्दनाक है कि हर समय एक फोन पर तत्पर रहने वाले मेरे बड़े भाई अब हमारे बीच नहीं रहे।
सागर भाई! तुम्हारी वह बेपरवाह मुस्कान, तुम्हारा अपनापन, मदद करने का वह अटूट जज़्बा और हर पल फोन पर मेरा हाल-चाल लेना... यह सब अब सिर्फ़ यादें बनकर रह गईं।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में उच्चतम स्थान दें और इस असहनीय दुःख की घड़ी में शोकाकुल परिवार को हिम्मत और शक्ति प्रदान करें।
अलविदा मेरे भाई... तुम बहुत याद आओगे! 💔💐
विनम्र श्रद्धांजलि।
ॐ शांति! 🙏
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