टाटीझरिया: हूल दिवस: जब टाटीझरिया के ‘लड़ाईटांड’ से गूंजा था महाक्रांति का बिगुल, डुगडुगी के थाप पर झरपो-राजगढ़ से हुआ था शंखनाद
हूल दिवस: जब टाटीझरिया के ‘लड़ाईटांड’ से गूंजा था महाक्रांति का बिगुल। डुगडुगी के थाप पर झरपो-राजगढ़ से हुआ था शंखनाद, आज भी प्रांसगिक है हूल की चेतना। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में झारखंड की माटी का योगदान अप्रतिम रहा है। जब 1855 में सिदो-कान्हू के आह्वान पर संथाल परगना से ब्रिटिश हुकूमत, महाजनों और जमींदारों के खिलाफ हूल का बिगुल फूंका गया था।