उत्तराखंड की लाचार शिक्षा प्रणाली। ग्राम सभा खदरी खड़क माफ के राजकीय इंटर कॉलेज में कक्षा 6 से 8 तक के 150 बच्चों की शिक्षा बिना टीचरों के पिछले 1 साल से प्रभावित । सीनियर के द्वारा जूनियर क्लास के लिए खुद ही स्कूल प्रशासन कर रहा टीचरों की व्यवस्था। कुछ ऐसे शिक्षक भी है जो रिटायर्ड हो चुके है फिर भी अपनी स्वेच्छा से स्कूल में दे रहे अपनी सेवा ताकि बच्चों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार की कोई अड़चन न आए।
एक जानकारी और देना चाहेंगे, उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने दो ऐसे विषय जो कि 10 वीं क्लास और 12 वीं क्लास के लिए अनिवार्य कर दिए है। ब्यूटिशन और टूरिज्म जिनका की 31 मार्च 2026 को बॉन्ड खत्म हो चुका है
और पिछले 4 महीने से उसको दोबारा से लागू नहीं किया गया है। किसके चलते उन दोनों विषयों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है क्योंकि टीचर ही नहीं है। और अगर टीचर ही नहीं होगा तो बच्चे एग्जाम में क्या करेंगे।
दो देख सकते है कितनी खामियां है, एक तरफ कहा जाता है शिक्षा हमारा अधिकार है। पर अब वही अधिकार धीरे धीरे हाथों से निकलता जा रहा है।
पहले ही कई सरकारी स्कूल बंद किए जा चुके है। और कई बंद होने की कगार पर है।
दुर्गम क्षेत्र में तो कई वर्षों से यह समस्या पैदा हो रखी थी, पर अब इस समस्या ने सुगम क्षेत्र में भी अपने पैर पसारने शुरू कर दिए।
अब निर्भर करता है उत्तराखंड सरकार और उसके शिक्षा विभाग पर की वो कितनी जल्दी इस समस्या का निवारण करती है।
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