कामदगिरी पर्वत पर आस्था के साथ खिलवाड़, वन विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल
प्राचीन मुखरबिंद के पास, आस्था से खिलवाड़, पर्वत मे चढ़ लोग करने लगे पेशाब और खाना बनाने खाने का कार्य
चित्रकूट। जिस कामदगिरी पर्वत को आस्था और श्रद्धा का केंद्र मानकर लाखों श्रद्धालु परिक्रमा करने पहुंचते हैं, उसी पवित्र पर्वत पर खुलेआम अव्यवस्था और गंदगी का नजारा देखने को मिल रहा है। लोग पर्वत पर बैठकर खाना बना रहे हैं, जगह-जगह गुटखा-पान खाकर गंदगी फैलाई जा रही है और यहां तक कि पेशाब करने के लिए भी स्थान बना लिए गए हैं।
हरियाली अमावस्या के विशाल मेले को लेकर पुलिसकर्मी अपने-अपने ड्यूटी प्वाइंट पर तैनात हैं, वहीं मजिस्ट्रेट भी निर्धारित सेक्टरों में व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि *कामदगिरी पर्वत और उसके वन क्षेत्र की निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाला वन विभाग आखिर कहां है?*
जब लाखों श्रद्धालु इस पर्वत की परिक्रमा कर रहे हैं, ऐसे में यदि किसी तरह की दुर्घटना या अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या वन क्षेत्र में इस तरह खुलेआम खाना बनाना, गंदगी फैलाना और अनुचित गतिविधियां रोकना वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है?
एक ओर प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कामदगिरी पर्वत की पवित्रता और पर्यावरण की अनदेखी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
*आस्था के इस पवित्र स्थल पर खुलेआम हो रही मनमानी आखिर कब रुकेगी? क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?*
कामदगिरी सिर्फ एक पर्वत नहीं, लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इसकी पवित्रता, सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन के साथ-साथ संबंधित विभागों की भी अहम जिम्मेदारी है।