### देव मिलन और कांकेर दशहरा
राजपरंपरा, आस्था और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत
कांकेर पैलेस और कांकेर दशहरा छत्तीसगढ़ की उन परंपराओं से जुड़े हैं, जहाँ राजपरिवार, स्थानीय देवी-देवताओं और जनजातीय समुदायों की आस्था एक साथ दिखाई देती है।
देव मिलन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्थानीय परंपराओं, सामुदायिक सहभागिता और ऐतिहासिक राजपरंपरा का प्रतीक भी है। वहीं, कांकेर दशहरा अपनी विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय रीति-रिवाजों के कारण बस्तर अंचल की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
### देव मिलन की परंपरा
कांकेर दशहरा के अवसर पर आसपास के गांवों से ग्रामीण अपने पारंपरिक देवी-देवताओं के साथ कांकेर राजमहल पहुँचते हैं। राजपरिवार द्वारा अंगादेव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोकनृत्यों के बीच यह आयोजन आस्था और सामूहिक सहभागिता का अनूठा दृश्य प्रस्तुत करता है।
### दशहरा मिलन का सामाजिक महत्व
रियासतकाल में दशहरा मिलन राजपरिवार और प्रजाजनों के बीच संवाद का अवसर भी था। समय के साथ इसका स्वरूप बदला है, लेकिन राजमहल और आसपास के ग्रामीण समुदायों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव आज भी इस परंपरा की विशेष पहचान है।
स्थान: कांकेर राजमहल, कांकेर, छत्तीसगढ़ अवसर: विजयादशमी / दशहरा मुख्य आकर्षण: देव मिलन, अंगादेव की पूजा, पारंपरिक वाद्ययंत्र, जनजातीय नृत्य और राजपरंपरा।
संदर्भ: कांकेर पैलेस · कांकेर दशहरा