उदयपुर में राष्ट्र चेतना का विराट संगम हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा:“महाराणा प्रताप की जयंती मनती है, अकबर की नहीं। विजय किसकी हुई, इसका उत्तर इतिहास स्वयं देता है।”
सरसंघचालक जी ने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध मात्र दो सेनाओं का युद्ध नहीं था, बल्कि राष्ट्रचेतना और स्वाभिमान की रक्षा के लिए सम्पूर्ण समाज द्वारा लड़ा गया महासंग्राम था। “भारत का इतिहास पराधीनता का नहीं, बल्कि विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध निरंतर संघर्ष और प्रतिरोध का है।”उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध के बाद भी मुगलों में भय और असुरक्षा बनी रही। ऐसे में वास्तविक विजय किसकी हुई, यह इतिहास स्वयं बताता है।
महाराणा प्रताप की सेना में सम्पूर्ण समाज एकजुट था, जाति-पंथ से ऊपर उठकर।
सीमित संसाधनों के बावजूद विशाल मुगल साम्राज्य को चुनौती दी गई।
महाराणा प्रताप ‘हिंदुआ सूरज’ बनकर सनातन संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के प्रतीक बने।
निम्बार्काचार्य श्रीजी श्याम शरण देवाचार्य जी ने कहा कि यह आयोजन इतिहास की भ्रांतियों का अंत और सनातन गौरव की पुनर्स्थापना का महापर्व है।
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