Bihar news : गौनाहा में बांध-सह-सड़क निर्माण योजना पर उठे सवाल, मुख्यमंत्री से जांच की मांग
..... पश्चिम चम्पारण। गौनाहा प्रखंड की बेलसंडी पंचायत अंतर्गत अहरार गांव के वार्ड संख्या-13 में जंगबहादुर राम के घर से पुलिया तक प्रस्तावित बांध-सह-सड़क निर्माण योजना को लेकर विवाद सामने आया है। योजना के निर्माण कार्य और इसकी उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए पंचायत के वार्ड सदस्य उमेश राउत ने बिहार के मुख्यमंत्री को आवेदन भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने योजना के नाम पर सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने तथा अनियमितता की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। वार्ड सदस्य द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए आवेदन में VBG RAMG के तहत दर्ज वर्क कोड 0512007010/FP/VB/20442539 का उल्लेख किया गया है। आवेदनकर्ता ने योजना के अंतर्गत बांध-सह-सड़क निर्माण की आवश्यकता, स्थल की भौगोलिक स्थिति और इसके संभावित प्रभावों को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जिस स्थान पर बांध निर्माण की योजना बनाई जा रही है, वहां से भोड़हा नदी की दूरी लगभग तीन किलोमीटर है। ऐसे में इस योजना को बांध के रूप में विकसित करने की आवश्यकता और इसकी उपयोगिता की जांच की जानी चाहिए। आवेदन में वार्ड सदस्य उमेश राउत ने बताया है कि भोड़हा नदी में सामान्यतः तीन से चार साल के अंतराल पर जलस्तर बढ़ने की स्थिति उत्पन्न होती है। उस दौरान नदी का कुछ पानी सड़क के समीप तक पहुंचता है और सड़क पार कर आगे निकल जाता है। उनका तर्क है कि वर्तमान स्थिति में पानी का प्राकृतिक बहाव बना हुआ है, लेकिन यदि उक्त सड़क को बांध का रूप दे दिया जाता है, तो पानी के निकास में बाधा उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई है कि बांध के कारण बारिश और बाढ़ का पानी सरेह में जमा हो सकता है। इससे खेतों में जलजमाव की स्थिति पैदा होने और फसलों के सड़ने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वार्ड सदस्य के अनुसार, कृषि भूमि और स्थानीय किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्माण योजना की तकनीकी जांच आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से यह भी अपेक्षा की है कि किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने से पहले स्थल की वास्तविक स्थिति, जलनिकासी की व्यवस्था और बाढ़ के पानी के प्राकृतिक प्रवाह का आकलन किया जाए, ताकि भविष्य में ग्रामीणों और किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
उमेश राउत ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि योजना का प्राक्कलन तैयार करने से पहले स्थानीय वार्ड सदस्य से कोई मंतव्य नहीं लिया गया। उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में संबंधित क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और ग्रामीणों की आवश्यकताओं को समझने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों से विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था। आवेदनकर्ता ने आरोप लगाया है कि तकनीकी सहायक द्वारा प्राक्कलन तैयार करने से पहले उनसे राय नहीं ली गई। उन्होंने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित तकनीकी सहायक या विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है। वार्ड सदस्य ने निर्माण स्थल पर योजना से संबंधित सूचना पट्ट नहीं लगाए जाने की बात भी कही है। उनका आरोप है कि कार्यस्थल पर योजना की जानकारी देने वाला बोर्ड नहीं होने से ग्रामीणों को निर्माण कार्य से जुड़ी आवश्यक जानकारियां नहीं मिल पा रही हैं। आवेदन में योजना की लागत, स्वीकृत प्राक्कलन, निर्माण कार्य की प्रकृति और अन्य संबंधित विवरणों की जांच कराने की मांग की गई है। वार्ड सदस्य का कहना है कि विकास योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कार्यस्थल पर योजना से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि ग्रामीण भी कार्य की निगरानी कर सकें। उमेश राउत ने आवेदन में पंचायत के रोजगार सेवक रोहित कुमार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही बरती जा रही है। आवेदनकर्ता ने संबंधित कर्मियों की भूमिका की जांच कराने और योजना से जुड़े सभी अभिलेखों का सत्यापन करने का अनुरोध किया है। उन्होंने योजना के चयन से लेकर प्राक्कलन तैयार करने और निर्माण कार्य की प्रक्रिया तक की जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी कहा है कि यदि जांच में सरकारी राशि के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वार्ड सदस्य उमेश राउत ने मुख्यमंत्री को दिए गए आवेदन में पूरे मामले की निष्पक्ष एवं अविलंब जांच कराने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि योजना की वास्तविक उपयोगिता और निर्माण स्थल की स्थिति की जांच कराई जाए, ताकि सरकारी धन का उचित उपयोग सुनिश्चित हो सके और किसानों की जमीन को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।अब इस मामले में प्रशासनिक जांच और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने का इंतजार है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि योजना के चयन, प्राक्कलन और क्रियान्वयन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं। हालांकि इस खबर में वर्णित सरकारी राशि के दुरुपयोग, कार्य में लापरवाही और अन्य अनियमितताओं से संबंधित आरोप वार्ड सदस्य उमेश राउत द्वारा मुख्यमंत्री को दिए गए आवेदन पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभाग, रोजगार सेवक एवं अन्य पक्षों का आधिकारिक बयान प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।