*"निंबाहेड़ा स्थित वंडर सीमेंट प्लांट की 5 चिमनियों से निकलता जहर, 'फर्क नज़र आएगा' का फर्क खेतों में नज़र आ रहा है"*
*दूषित धूल से जमीन बंजर होने का अंदेशा, ग्रामीण बोले - 'विकास नहीं विनाश नजर आ रहा है'*
_जयपुर/निंबाहेड़ा :कमलेश आमेटा निंबाहेड़ा क्षेत्र में स्थित वंडर सीमेंट प्लांट का नारा है _"फर्क नज़र आएगा"_। और फर्क वाकई नज़र आ रहा है - लेकिन तरक्की का नहीं, तबाही का।
प्लांट की पांच चिमनियों से 24 घंटे निकल रहा जहरीला केमिकल और धूल अब आसपास के गांवों के लिए जी का जंजाल बन गया है।
प्लांट से उड़ती दूषित धूल सीधे किसानों के खेतों में गिर रही है। अभी किसान खरीफ की जुताई-बुवाई में जुटे हैं, पर खेतों में पहले से ही भूरी जहरीली परत जम चुकी है। ग्रामीणों को डर है कि इसी धूल की वजह से जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाएगी और आने वाली फसल चौपट हो जाएगी।
रात होते ही प्लांट की ऊंची चिमनियों से निकलता धुआं पूरे इलाके में जहर घोल देता है। सुबह होते-होते खेत, पेड़, घरों की छतें - सब पर केमिकल वाली धूल की मोटी चादर मिलती है। खेती के साथ-साथ लोगों और मवेशियों की सेहत पर भी इसका असर साफ दिख रहा है।
*ग्रामीणों की 3 बड़ी मांगें*
1. *प्रदूषण नियंत्रण*: प्लांट में लगे प्रदूषण नियंत्रण यंत्रों को तुरंत दुरुस्त कर 24 घंटे चलाया जाए।
2. *जांच*: प्रदूषण नियंत्रण मंडल तुरंत प्लांट, हवा और खेतों की मिट्टी की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
3. *सुरक्षा और मुआवजा*: यदि इस धूल से फसल खराब होती है तो जिम्मेदार कंपनी किसानों को मुआवजा दे।
_"फर्क नज़र आएगा? हां, बंजर खेतों और बीमार लोगों के रूप में फर्क नज़र आ रहा है"_
किसानों का कहना है कि उद्योग का मतलब विकास होता है, विनाश नहीं। अगर यही 'फर्क' है तो हमें ऐसा विकास नहीं चाहिए।
*विभाग का पक्ष*
पूर्व में वंडर सीमेंट की वायरल खबर के बाद *प्रदूषण नियंत्रण विभाग* से श्री मीणा जी ने हमारे विशेष संवाददाता से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि _"हम राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, सीबीआई से बोल रहे हैं। हम वंडर सीमेंट के इस प्रदूषण मामले की जांच कर रहे हैं।"_
अब सवाल ये है कि *क्या वंडर सीमेंट लिमिटेड के विरुद्ध कोई ठोस कार्यवाही हुई?*
या फिर *कार्यवाही के नाम पर सिर्फ लीपापोती* की गई?
ग्रामीण और किसान विभाग से मांग करते हैं कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और दोषियों पर तुरंत कार्रवाई हो!