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बालाघाट जंगल में बाघ का हमला, ग्रामीण की मौत इलाके में दहशत का माहौल बालाघाट जिले के कटंगी-खैरलांजी क्षेत्र के ग्राम पांढरवानी में बाघ के हमले में 48 वर्षीय ग्रामीण देवकरण बागमारे की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि देवकरण रविवार को मवेशी चराने जंगल गए थे, लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटे। सोमवार सुबह ग्रामीणों ने खैराटोला-सतीटोला कक्ष क्रमांक 809 के पास झाड़ियों में उनका क्षत-विक्षत शव बरामद किया। मौके पर दो मवेशी भी मृत मिले। शव पर बाघ के हमले के निशान पाए गए हैं। सूचना पर पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अकेले जंगल नहीं जाने और सतर्क रहने की अपील की है। मामले की जांच जारी है। बालाघाट से HALCHAL24NEWS के लिए शिवम असाटी की रिपोर्ट। #Balaghat #TigerAttack #Khairlanji #Katangi #Wildlife #HumanWildlifeConflict #MadhyaPradesh #BreakingNews #Halchal24News

Dindori, Dindori | Aug 11, 2026

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तीन साल में ही बह गई 7 करोड़ की सड़क, बारिश ने खोली निर्माण की पोल!

डिंडौरी जिले में मानसून की बारिश ने करोड़ों रुपये की लागत से हुए सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य मार्ग से कुसेरा गांव तक करीब 12 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग तीन साल पहले कराया गया था, लेकिन तेज बारिश के बाद धमनी गांव के पास पुल का एक हिस्सा धराशाई हो गया। सड़क का मलबा बहकर किसानों के खेतों तक पहुंच गया, जिससे खड़ी फसल भी प्रभावित हुई है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक बारिश के दौरान पानी का तेज बहाव सड़क और पुलिया के आसपास से गुजरा। इसी दौरान पुल का हिस्सा टूट गया और सड़क का मलबा पानी के साथ बहकर खेतों में जा पहुंचा। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत से तैयार खड़ी फसल इस मलबे की चपेट में आकर बर्बाद हुई है।

निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

करीब तीन साल पहले बनी सड़क और पुल के इस तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान सड़क की मजबूती और जल निकासी व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था तो महज तीन साल में पुल का हिस्सा कैसे धराशाई हो गया? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता की पर्याप्त निगरानी की गई थी? क्या सड़क और पुल की तकनीकी जांच कर निर्माण को स्वीकृति दी गई थी?

हालांकि सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने की वास्तविक वजह क्या रही तथा इसमें तकनीकी या गुणवत्ता संबंधी कोई कमी थी या नहीं, यह **निष्पक्ष तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।**

भुरका में भी पुल की हालत चिंताजनक

इसी मार्ग पर भुरका गांव के पास बने पुल की हालत भी जर्जर होने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों में आशंका है कि यदि समय रहते आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने पूरे सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में यदि लापरवाही या गुणवत्ता संबंधी कमी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

वहीं किसानों ने बारिश के कारण हुए फसल नुकसान का भी आकलन कर उचित राहत और मुआवजा दिलाने की मांग की है।

फिलहाल करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क के महज तीन साल में क्षतिग्रस्त होने से सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब नजर जिला प्रशासन की तकनीकी जांच और आगे की कार्रवाई पर है।

#Dindori #DindoriNews #RoadQuality #RoadConstruction #PMGSY #MadhyaPradesh #BreakingNews #RainDamage #Infrastructure #RoadCorruption #डिंडौरी #डिंडौरी_न्यूज़ #सड़क_निर्माण #सड़क_की_गुणवत्ता #बारिश #पुल_क्षतिग्रस्त #निर्माण_कार्य #तकनीकी_जांच #किसानों_की_फसल #मध्यप्रदेश #ब्रेकिंग_न्यूज़ Part 8

तीन साल में ही बह गई 7 करोड़ की सड़क, बारिश ने खोली निर्माण की पोल! डिंडौरी जिले में मानसून की बारिश ने करोड़ों रुपये की लागत से हुए सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य मार्ग से कुसेरा गांव तक करीब 12 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग तीन साल पहले कराया गया था, लेकिन तेज बारिश के बाद धमनी गांव के पास पुल का एक हिस्सा धराशाई हो गया। सड़क का मलबा बहकर किसानों के खेतों तक पहुंच गया, जिससे खड़ी फसल भी प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बारिश के दौरान पानी का तेज बहाव सड़क और पुलिया के आसपास से गुजरा। इसी दौरान पुल का हिस्सा टूट गया और सड़क का मलबा पानी के साथ बहकर खेतों में जा पहुंचा। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत से तैयार खड़ी फसल इस मलबे की चपेट में आकर बर्बाद हुई है। निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल करीब तीन साल पहले बनी सड़क और पुल के इस तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान सड़क की मजबूती और जल निकासी व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था तो महज तीन साल में पुल का हिस्सा कैसे धराशाई हो गया? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता की पर्याप्त निगरानी की गई थी? क्या सड़क और पुल की तकनीकी जांच कर निर्माण को स्वीकृति दी गई थी? हालांकि सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने की वास्तविक वजह क्या रही तथा इसमें तकनीकी या गुणवत्ता संबंधी कोई कमी थी या नहीं, यह **निष्पक्ष तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।** भुरका में भी पुल की हालत चिंताजनक इसी मार्ग पर भुरका गांव के पास बने पुल की हालत भी जर्जर होने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों में आशंका है कि यदि समय रहते आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। जांच और कार्रवाई की मांग ग्रामीणों ने पूरे सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में यदि लापरवाही या गुणवत्ता संबंधी कमी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वहीं किसानों ने बारिश के कारण हुए फसल नुकसान का भी आकलन कर उचित राहत और मुआवजा दिलाने की मांग की है। फिलहाल करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क के महज तीन साल में क्षतिग्रस्त होने से सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब नजर जिला प्रशासन की तकनीकी जांच और आगे की कार्रवाई पर है। #Dindori #DindoriNews #RoadQuality #RoadConstruction #PMGSY #MadhyaPradesh #BreakingNews #RainDamage #Infrastructure #RoadCorruption #डिंडौरी #डिंडौरी_न्यूज़ #सड़क_निर्माण #सड़क_की_गुणवत्ता #बारिश #पुल_क्षतिग्रस्त #निर्माण_कार्य #तकनीकी_जांच #किसानों_की_फसल #मध्यप्रदेश #ब्रेकिंग_न्यूज़ Part 8

Dindori, Dindori | Aug 11, 2026

तीन साल में ही बह गई 7 करोड़ की सड़क, बारिश ने खोली निर्माण की पोल!

डिंडौरी जिले में मानसून की बारिश ने करोड़ों रुपये की लागत से हुए सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य मार्ग से कुसेरा गांव तक करीब 12 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग तीन साल पहले कराया गया था, लेकिन तेज बारिश के बाद धमनी गांव के पास पुल का एक हिस्सा धराशाई हो गया। सड़क का मलबा बहकर किसानों के खेतों तक पहुंच गया, जिससे खड़ी फसल भी प्रभावित हुई है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक बारिश के दौरान पानी का तेज बहाव सड़क और पुलिया के आसपास से गुजरा। इसी दौरान पुल का हिस्सा टूट गया और सड़क का मलबा पानी के साथ बहकर खेतों में जा पहुंचा। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत से तैयार खड़ी फसल इस मलबे की चपेट में आकर बर्बाद हुई है।

निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

करीब तीन साल पहले बनी सड़क और पुल के इस तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान सड़क की मजबूती और जल निकासी व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था तो महज तीन साल में पुल का हिस्सा कैसे धराशाई हो गया? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता की पर्याप्त निगरानी की गई थी? क्या सड़क और पुल की तकनीकी जांच कर निर्माण को स्वीकृति दी गई थी?

हालांकि सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने की वास्तविक वजह क्या रही तथा इसमें तकनीकी या गुणवत्ता संबंधी कोई कमी थी या नहीं, यह **निष्पक्ष तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।**

भुरका में भी पुल की हालत चिंताजनक

इसी मार्ग पर भुरका गांव के पास बने पुल की हालत भी जर्जर होने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों में आशंका है कि यदि समय रहते आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने पूरे सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में यदि लापरवाही या गुणवत्ता संबंधी कमी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

वहीं किसानों ने बारिश के कारण हुए फसल नुकसान का भी आकलन कर उचित राहत और मुआवजा दिलाने की मांग की है।

फिलहाल करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क के महज तीन साल में क्षतिग्रस्त होने से सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब नजर जिला प्रशासन की तकनीकी जांच और आगे की कार्रवाई पर है।

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तीन साल में ही बह गई 7 करोड़ की सड़क, बारिश ने खोली निर्माण की पोल! डिंडौरी जिले में मानसून की बारिश ने करोड़ों रुपये की लागत से हुए सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य मार्ग से कुसेरा गांव तक करीब 12 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग तीन साल पहले कराया गया था, लेकिन तेज बारिश के बाद धमनी गांव के पास पुल का एक हिस्सा धराशाई हो गया। सड़क का मलबा बहकर किसानों के खेतों तक पहुंच गया, जिससे खड़ी फसल भी प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बारिश के दौरान पानी का तेज बहाव सड़क और पुलिया के आसपास से गुजरा। इसी दौरान पुल का हिस्सा टूट गया और सड़क का मलबा पानी के साथ बहकर खेतों में जा पहुंचा। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत से तैयार खड़ी फसल इस मलबे की चपेट में आकर बर्बाद हुई है। निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल करीब तीन साल पहले बनी सड़क और पुल के इस तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान सड़क की मजबूती और जल निकासी व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था तो महज तीन साल में पुल का हिस्सा कैसे धराशाई हो गया? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता की पर्याप्त निगरानी की गई थी? क्या सड़क और पुल की तकनीकी जांच कर निर्माण को स्वीकृति दी गई थी? हालांकि सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने की वास्तविक वजह क्या रही तथा इसमें तकनीकी या गुणवत्ता संबंधी कोई कमी थी या नहीं, यह **निष्पक्ष तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।** भुरका में भी पुल की हालत चिंताजनक इसी मार्ग पर भुरका गांव के पास बने पुल की हालत भी जर्जर होने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों में आशंका है कि यदि समय रहते आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। जांच और कार्रवाई की मांग ग्रामीणों ने पूरे सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में यदि लापरवाही या गुणवत्ता संबंधी कमी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वहीं किसानों ने बारिश के कारण हुए फसल नुकसान का भी आकलन कर उचित राहत और मुआवजा दिलाने की मांग की है। फिलहाल करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क के महज तीन साल में क्षतिग्रस्त होने से सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब नजर जिला प्रशासन की तकनीकी जांच और आगे की कार्रवाई पर है। #Dindori #DindoriNews #RoadQuality #RoadConstruction #PMGSY #MadhyaPradesh #BreakingNews #RainDamage #Infrastructure #RoadCorruption #डिंडौरी #डिंडौरी_न्यूज़ #सड़क_निर्माण #सड़क_की_गुणवत्ता #बारिश #पुल_क्षतिग्रस्त #निर्माण_कार्य #तकनीकी_जांच #किसानों_की_फसल #मध्यप्रदेश #ब्रेकिंग_न्यूज़ Part 7

Dindori, Dindori | Aug 11, 2026

तीन साल में ही बह गई 7 करोड़ की सड़क, बारिश ने खोली निर्माण की पोल!

डिंडौरी जिले में मानसून की बारिश ने करोड़ों रुपये की लागत से हुए सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य मार्ग से कुसेरा गांव तक करीब 12 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग तीन साल पहले कराया गया था, लेकिन तेज बारिश के बाद धमनी गांव के पास पुल का एक हिस्सा धराशाई हो गया। सड़क का मलबा बहकर किसानों के खेतों तक पहुंच गया, जिससे खड़ी फसल भी प्रभावित हुई है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक बारिश के दौरान पानी का तेज बहाव सड़क और पुलिया के आसपास से गुजरा। इसी दौरान पुल का हिस्सा टूट गया और सड़क का मलबा पानी के साथ बहकर खेतों में जा पहुंचा। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत से तैयार खड़ी फसल इस मलबे की चपेट में आकर बर्बाद हुई है।

निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

करीब तीन साल पहले बनी सड़क और पुल के इस तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान सड़क की मजबूती और जल निकासी व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था तो महज तीन साल में पुल का हिस्सा कैसे धराशाई हो गया? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता की पर्याप्त निगरानी की गई थी? क्या सड़क और पुल की तकनीकी जांच कर निर्माण को स्वीकृति दी गई थी?

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भुरका में भी पुल की हालत चिंताजनक

इसी मार्ग पर भुरका गांव के पास बने पुल की हालत भी जर्जर होने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों में आशंका है कि यदि समय रहते आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने पूरे सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में यदि लापरवाही या गुणवत्ता संबंधी कमी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

वहीं किसानों ने बारिश के कारण हुए फसल नुकसान का भी आकलन कर उचित राहत और मुआवजा दिलाने की मांग की है।

फिलहाल करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क के महज तीन साल में क्षतिग्रस्त होने से सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब नजर जिला प्रशासन की तकनीकी जांच और आगे की कार्रवाई पर है।

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तीन साल में ही बह गई 7 करोड़ की सड़क, बारिश ने खोली निर्माण की पोल! डिंडौरी जिले में मानसून की बारिश ने करोड़ों रुपये की लागत से हुए सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य मार्ग से कुसेरा गांव तक करीब 12 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग तीन साल पहले कराया गया था, लेकिन तेज बारिश के बाद धमनी गांव के पास पुल का एक हिस्सा धराशाई हो गया। सड़क का मलबा बहकर किसानों के खेतों तक पहुंच गया, जिससे खड़ी फसल भी प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बारिश के दौरान पानी का तेज बहाव सड़क और पुलिया के आसपास से गुजरा। इसी दौरान पुल का हिस्सा टूट गया और सड़क का मलबा पानी के साथ बहकर खेतों में जा पहुंचा। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत से तैयार खड़ी फसल इस मलबे की चपेट में आकर बर्बाद हुई है। निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल करीब तीन साल पहले बनी सड़क और पुल के इस तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान सड़क की मजबूती और जल निकासी व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था तो महज तीन साल में पुल का हिस्सा कैसे धराशाई हो गया? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता की पर्याप्त निगरानी की गई थी? क्या सड़क और पुल की तकनीकी जांच कर निर्माण को स्वीकृति दी गई थी? हालांकि सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने की वास्तविक वजह क्या रही तथा इसमें तकनीकी या गुणवत्ता संबंधी कोई कमी थी या नहीं, यह **निष्पक्ष तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।** भुरका में भी पुल की हालत चिंताजनक इसी मार्ग पर भुरका गांव के पास बने पुल की हालत भी जर्जर होने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों में आशंका है कि यदि समय रहते आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। जांच और कार्रवाई की मांग ग्रामीणों ने पूरे सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में यदि लापरवाही या गुणवत्ता संबंधी कमी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वहीं किसानों ने बारिश के कारण हुए फसल नुकसान का भी आकलन कर उचित राहत और मुआवजा दिलाने की मांग की है। फिलहाल करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क के महज तीन साल में क्षतिग्रस्त होने से सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब नजर जिला प्रशासन की तकनीकी जांच और आगे की कार्रवाई पर है। #Dindori #DindoriNews #RoadQuality #RoadConstruction #PMGSY #MadhyaPradesh #BreakingNews #RainDamage #Infrastructure #RoadCorruption #डिंडौरी #डिंडौरी_न्यूज़ #सड़क_निर्माण #सड़क_की_गुणवत्ता #बारिश #पुल_क्षतिग्रस्त #निर्माण_कार्य #तकनीकी_जांच #किसानों_की_फसल #मध्यप्रदेश #ब्रेकिंग_न्यूज़ Part 12

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तीन साल में ही बह गई 7 करोड़ की सड़क, बारिश ने खोली निर्माण की पोल!

डिंडौरी जिले में मानसून की बारिश ने करोड़ों रुपये की लागत से हुए सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य मार्ग से कुसेरा गांव तक करीब 12 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग तीन साल पहले कराया गया था, लेकिन तेज बारिश के बाद धमनी गांव के पास पुल का एक हिस्सा धराशाई हो गया। सड़क का मलबा बहकर किसानों के खेतों तक पहुंच गया, जिससे खड़ी फसल भी प्रभावित हुई है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक बारिश के दौरान पानी का तेज बहाव सड़क और पुलिया के आसपास से गुजरा। इसी दौरान पुल का हिस्सा टूट गया और सड़क का मलबा पानी के साथ बहकर खेतों में जा पहुंचा। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत से तैयार खड़ी फसल इस मलबे की चपेट में आकर बर्बाद हुई है।

निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

करीब तीन साल पहले बनी सड़क और पुल के इस तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान सड़क की मजबूती और जल निकासी व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था तो महज तीन साल में पुल का हिस्सा कैसे धराशाई हो गया? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता की पर्याप्त निगरानी की गई थी? क्या सड़क और पुल की तकनीकी जांच कर निर्माण को स्वीकृति दी गई थी?

हालांकि सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने की वास्तविक वजह क्या रही तथा इसमें तकनीकी या गुणवत्ता संबंधी कोई कमी थी या नहीं, यह **निष्पक्ष तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।**

भुरका में भी पुल की हालत चिंताजनक

इसी मार्ग पर भुरका गांव के पास बने पुल की हालत भी जर्जर होने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों में आशंका है कि यदि समय रहते आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने पूरे सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में यदि लापरवाही या गुणवत्ता संबंधी कमी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

वहीं किसानों ने बारिश के कारण हुए फसल नुकसान का भी आकलन कर उचित राहत और मुआवजा दिलाने की मांग की है।

फिलहाल करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क के महज तीन साल में क्षतिग्रस्त होने से सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब नजर जिला प्रशासन की तकनीकी जांच और आगे की कार्रवाई पर है।

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Dindori, Dindori | Aug 11, 2026