*सॉफ्टवेयर इंजीनियर से सफल मत्स्य उद्यमी बने सुजीत कुमार चौधरी*
*तकनीक और नवाचार के जरिए किसानों के लिए बने प्रेरणास्रोत*
*अमेरिका में नौकरी से लेकर अपने गांव की धरती पर मत्स्य पालन तक का सफर*
*आज 350 एकड़ क्षेत्र में 50 से अधिक किसानों के साथ कर रहे मत्स्य उत्पादन*
*रायबरेली- 30 सितम्बर 2026,*
कड़ी मेहनत, निरंतर प्रयास और कुछ नया करने का जुनून हो तो कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को हकीकत में बदल सकता है। इसका प्रेरणादायी उदाहरण हैं उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के वाल्टरगंज निवासी सुजीत कुमार चौधरी, जिन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शिक्षा और अमेरिका में नौकरी करने के बाद अपने देश लौटकर कृषि एवं मत्स्य पालन के क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। तकनीक, उद्यमिता और आधुनिक कृषि पद्धतियों के समन्वय से उन्होंने न केवल स्वयं सफलता हासिल की, बल्कि बड़ी संख्या में किसानों को भी मत्स्य पालन से जोड़कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया।
सुजीत कुमार चौधरी ने वर्ष 2005 में नोएडा से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा पूरी करने के बाद उनका करियर उन्हें अमेरिका तक ले गया। वर्ष 2010 में उन्होंने अमेरिका की एक कंपनी में कार्य करना शुरू किया और वहां रहते हुए तकनीकी क्षेत्र में अनुभव प्राप्त किया। लेकिन अपने देश और अपनी मिट्टी से जुड़ाव के चलते वर्ष 2016 में उन्होंने भारत लौटने का निर्णय लिया।
भारत वापस आने के बाद उन्होंने नोएडा में वर्ष 2016 में अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी की शुरुआत की। हालांकि, इसी दौरान उनके जीवन में एक नया मोड़ आया। कृषि व्यवसाय से जुड़े पारिवारिक परिवेश ने उन्हें खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर सोचने के लिए प्रेरित किया।
सुजीत कुमार चौधरी बताते हैं कि उनका बैकग्राउंड कृषि व्यवसाय से जुड़ा रहा है। उनका मानना था कि सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में तकनीक का लाभ अपेक्षाकृत सीमित लोगों तक पहुंचता है, जबकि भारत कृषि प्रधान देश है और कृषि से जुड़ा कोई भी नवाचार बड़ी संख्या में लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
उन्होंने महसूस किया कि यदि आधुनिक तकनीक, बाजार की समझ और उद्यमिता को कृषि के साथ जोड़ा जाए तो किसानों की आय और ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर तकनीकी एवं व्यावसायिक दृष्टिकोण के साथ कृषि क्षेत्र में उद्यम करने का निर्णय लिया।
जब देश में स्टार्टअप इंडिया जैसी पहल के माध्यम से नवाचार और उद्यमिता का वातावरण तैयार हो रहा था, तब सुजीत कुमार चौधरी ने कृषि क्षेत्र में अपना स्टार्टअप शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने खेती के पारंपरिक तौर-तरीकों के बजाय बाजार की मांग, तकनीक और आधुनिक प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए मत्स्य पालन को अपने व्यवसाय के रूप में चुना और मत्स्य विभाग से सम्पर्क कर योजनाओं की जानकारी लेकर प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का लाभ लेकर मत्स्य पालन का कार्य शुरू किया।
जनपद रायबरेली की महाराजगंज तहसील क्षेत्र के बावन बुजुर्ग बल्ला गांव में लगभग 15 एकड़ भूमि लेकर तालाब विकसित कराया और उसमें मत्स्य पालन का कार्य शुरू किया, शुरुआत में यह उनके लिए एक नया अनुभव था, लेकिन तकनीकी पृष्ठभूमि, प्रबंधन क्षमता, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और मेहनत के बल पर उन्होंने मत्स्य पालन को व्यवस्थित एवं आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे उनके प्रयासों का प्रभाव आसपास के किसानों पर भी पड़ा। किसानों ने मत्स्य पालन की संभावनाओं को समझा और इस व्यवसाय से जुड़ना शुरू किया। आज उनका मत्स्य पालन का कार्य केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक उद्यम के रूप में विकसित हो चुका है।
वर्तमान में सुजीत कुमार चौधरी के साथ रायबरेली, उन्नाव एवं प्रतापगढ़ जनपद के 50 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं, जो लगभग 350 एकड़ क्षेत्रफल में मत्स्य पालन का कार्य कर रहे हैं। किसानों को मत्स्य पालन से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन, उत्पादन एवं बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे किसानों को खेती के साथ आय के वैकल्पिक और लाभकारी स्रोत के रूप में मत्स्य पालन को अपनाने का अवसर मिला है।
श्री चौधरी का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल स्वयं सफल होना नहीं है, बल्कि अधिक से अधिक किसानों को आधुनिक कृषि एवं मत्स्य पालन से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उनका मानना है कि कृषि में तकनीक और उद्यमिता का समावेश किसानों के जीवन में व्यापक बदलाव ला सकता है।
मत्स्य पालन से जुड़ने वाले किसानों के लिए यह व्यवसाय आय का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। किसानों ने पारंपरिक कृषि के साथ मत्स्य पालन को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
सुजीत कुमार चौधरी की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि यदि कृषि को केवल परंपरागत गतिविधि न मानकर व्यवसाय, तकनीक, बाजार और उद्यमिता से जोड़ा जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
आज सुजीत कुमार चौधरी का सफर उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद केवल नौकरी को ही अपना भविष्य मानते हैं। उन्होंने दिखाया कि सफलता का रास्ता केवल नौकरी से होकर नहीं गुजरता, बल्कि अपने ज्ञान, अनुभव और तकनीकी दक्षता का उपयोग कर कृषि जैसे क्षेत्र में भी नई संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं।