चंबा में बाबा श्रीचंद जी महाराज के 532वें प्रकाशोत्सव पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
प्राचीन मंदिर में सुबह से लगी श्रद्धालुओं की कतारें, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण से भक्तिमय हुआ वातावरण
चंबा 20 सितम्बर
ऐतिहासिक चंबा की धरती आज आस्था और भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। श्री गुरु नानक देव जी के ज्येष्ठ पुत्र बाबा श्रीचंद जी महाराज के 532वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर उनके प्राचीन मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे अनुयायियों ने बाबा श्रीचंद जी महाराज के श्रीचरणों में शीश नवाया और सुख-शांति की कामना की। पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के बीच पूरा मंदिर परिसर दिनभर धार्मिक उल्लास से सराबोर रहा।
एक महीने से चल रही थीं तैयारियां
प्रकाशोत्सव को लेकर करीब एक महीने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया और बाहर से आने वाली संगत के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं की गईं। प्रकाशोत्सव के अवसर पर बाबा श्रीचंद जी महाराज के अनुयायियों ने देश-विदेश से पहुंची संगत का स्वागत किया और सभी को प्रकाशोत्सव की शुभकामनाएं दीं।
उदासीन परंपरा के प्रमुख संत माने जाते हैं बाबा श्रीचंद
बाबा श्रीचंद जी महाराज को उदासीन परंपरा के प्रमुख संतों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण किया और चंबा की धरती पर भी उनके चरण पड़े।
बाबा श्रीचंद जी महाराज से जुड़ी कई धार्मिक एवं ऐतिहासिक मान्यताएं आज भी चंबा की लोक आस्था का हिस्सा हैं।
पवित्र शिला से जुड़ी है अनूठी धार्मिक मान्यता
बाबा श्रीचंद जी महाराज के चंबा आगमन से जुड़ी सबसे प्रमुख मान्यताओं में मंदिर परिसर में स्थित पवित्र शिला का विशेष स्थान है।
स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में जब साधु-संतों के चंबा में प्रवेश पर रोक थी, तब बाबा श्रीचंद जी महाराज को रावी नदी के उस पार रोक दिया गया। मान्यता है कि उस समय बाबा जी ने नदी किनारे पड़ी एक शिला को रावी पार ले जाने का आदेश दिया।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक, इसके बाद वह शिला बाबा श्रीचंद जी महाराज को लेकर रावी नदी पार पहुंची और चंबा नगर के तीन चक्कर लगाने के बाद वर्तमान स्थान पर आकर रुक गई।
कहा जाता है कि इस घटना के बाद चंबा के राजा ने बाबा श्रीचंद जी महाराज के चरणों में नतमस्तक होकर क्षमा मांगी। स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार बाबा जी ने राजा को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद भी दिया।
आज भी आस्था का केंद्र है पवित्र शिला
स्थानीय मान्यता के अनुसार बाबा श्रीचंद जी महाराज कुछ समय के लिए इसी पवित्र शिला से उतरे और फिर अंतर्ध्यान हो गए। एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाद में मणिमहेश मार्ग पर धनछोह में किसी संत ने बाबा श्रीचंद जी महाराज के दर्शन किए थे।
इन धार्मिक मान्यताओं का प्रमाणिक ऐतिहासिक दस्तावेजों से अलग-अलग मूल्यांकन हो सकता है, लेकिन स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए यह परंपरा आज भी गहरी आस्था का विषय है।
आज भी दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु मंदिर में स्थित इस पवित्र शिला के दर्शन करते हैं और इसे बाबा श्रीचंद जी महाराज के आशीर्वाद से जोड़कर देखते हैं।
देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंची संगत
532वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर चंबा के अलावा बाहरी राज्यों से भी बड़ी संख्या में बाबा श्रीचंद जी महाराज के अनुयायी पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मंदिर में माथा टेका, पूजा-अर्चना की, भजन-कीर्तन में हिस्सा लिया और प्रसाद ग्रहण किया।
दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और पूरा वातावरण भक्ति एवं श्रद्धा से सराबोर नजर आया।
चंबा की पहचान में संत परंपरा की भी अहम भूमिका
चंबा की पहचान केवल ऐतिहासिक इमारतों, प्राचीन मंदिरों और खूबसूरत वादियों तक सीमित नहीं है। यहां की मिट्टी में सदियों पुरानी धार्मिक आस्था, लोक परंपराएं और संत संस्कृति भी गहराई से रची-बसी है।
बाबा श्रीचंद जी महाराज का प्राचीन मंदिर इसी धार्मिक विरासत और आस्था की जीवंत तस्वीर है, जहां हर वर्ष प्रकाशोत्सव के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचकर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।
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Chamba, Chamba | Sep 20, 2026