छुट्टियों की आड़ में 'बुलडोजर' चलाने की तैयारी: खजुरी मांडा सरपंच पर वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह कर व्यक्तिगत द्वेष साधने का आरोप
सीतामऊ - ग्राम पंचायत खजुरी मांडा में प्रशासनिक मर्यादाओं और माननीय उच्च न्यायालय के कड़े कानूनी दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए एक परिवार का वर्षों पुराना आशियाना उजाड़ने के प्रयास करने का मामला सामने आया है, जहाँ वर्तमान सरपंच द्वारा जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को झूठी व भ्रामक जानकारी देकर सरेआम गुमराह किया जा रहा है और अपने पद की धौंस दिखाकर व्यक्तिगत द्वेष के चलते एक वैध पक्के मकान को ढहाने का मात्र 5 दिवसीय तानाशाही अल्टीमेटम (नोटिस) जारी कर दिया गया है। पीड़ित परिवार के अनुसार, सरपंच का यह दावा पूरी तरह खोखला और दुर्भावना से प्रेरित है, क्योंकि जिस मकान को अवैध बताया जा रहा है उस पर पंचायत की नियमित टैक्स रसीदें, वैध बिजली व नल कनेक्शन जैसे पुख्ता ऑन-रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें किसी भी स्तर पर चुनौती नहीं दी जा सकती साथ ही सबसे बड़ा अकाट्य प्रशासनिक सच यह है कि वर्ष 2019 में आई भीषण बाढ़ के दौरान इसी मकान के क्षतिग्रस्त होने पर मप्र शासन द्वारा बकायदा सरकारी मुआवजा स्वीकृत किया गया था और उस वक्त खुद इसी ग्राम पंचायत तथा राजस्व विभाग के अमले ने उक्त परिवार के इसी स्थान पर पुश्तैनी रूप से रहने की आधिकारिक अनुशंसा (सत्यापन रिपोर्ट) दर्ज की थी। इस प्रमाणित शासकीय सत्य के बावजूद, पीड़ित का सीधा आरोप है कि सरपंच द्वारा व्यक्तिगत रंजिश के तहत जानबूझकर शासकीय अवकाश के दिनों को चुना गया है ताकि नियमों को ताक पर रखकर इस अवैध व एकतरफा कार्रवाई को अंजाम दिया जा सके, जो कि म.प्र. पंचायत राज अधिनियम की धारा 56 की मूल भावना का खुला मखौल, बिना आधिकारिक सीमांकन व उचित नाप-जोख किए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की हत्या और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 329(3) के तहत किसी की स्थापित निजी संपत्ति को दुर्भावनापूर्वक भारी क्षति पहुंचाने का एक गंभीर व दंडनीय कृत्य है। खबर यह भी है कि सरपंच द्वारा अधिकारियों को पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत जानकारी देकर गुमराह किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि उक्त पीड़ित व्यक्ति का जहां पूर्व में पुराना मकान था, उससे भी पीड़ित द्वारा दोनों तरफ एक-एक फीट जगह खाली छोड़ी गई है जो मौके पर स्पष्ट दिखाई दे रही है; यही नहीं, ग्राम पंचायत द्वारा पूर्व में इस गली में जो सीसी रोड बनाया गया था, पीड़ित ने उस सड़क से भी करीब एक-एक फीट जगह छोड़कर ही अपने नए मकान का निर्माण किया है, जिससे किसी भी तरह के अतिक्रमण का दावा पूरी तरह झूठा साबित होता है और दुर्भावनापूर्वक की जा रही इस एकतरफा कार्रवाई से भविष्य में जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर भारी कानूनी आंच आना तय है।