पत्रकार का सवाल: अशोक गहलोत साहब अब राजस्थान में ही राजनीति करेंगे या दिल्ली जाएँगे?
मेरा जवाब: देखिए, मैंने पहले भी कहा है और आज फिर दोहराता हूँ- 'मैं थांसू दूर नहीं' (मैं आपसे दूर नहीं हूँ)। अब मैं चाहे लंदन जाऊँ, दिल्ली जाऊँ, जयपुर रहूँ, जोधपुर जाऊँ या जालौर जाऊँ, मैं राजस्थान की जनता से कभी दूर नहीं हो सकता। मैं कहीं भी रहूँ, राजस्थान वासियों की सेवा करना ही मेरा परम कर्तव्य और धर्म है। राजस्थान की जनता ने मुझे पाँच बार सांसद बनाया, छह बार विधायक बनाया, केंद्रीय मंत्री बनाया और तीन-तीन बार मुख्यमंत्री की ज़िम्मेदारी दी। तीन बार मुख्यमंत्री बनना कोई छोटी बात नहीं होती!
श्रीमती सोनिया गांधी जी और राहुल गांधी जी ने मुझ पर भरोसा जताकर न सिर्फ मुझे तीन बार मुख्यमंत्री बनाया, बल्कि हर बार पूरे पाँच-पाँच साल तक काम करने का अवसर दिया। पूरे हिंदुस्तान के राजनीतिक इतिहास में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है, जहाँ अक्सर मुख्यमंत्री बदलते रहते हैं। मुझे इस पार्टी और जनता से सब कुछ मिला है।
अब मेरा यह फ़र्ज़ बनता है कि मैं अपने लिए किसी पद की माँग न करूँ। पार्टी मुझे जो भी ज़िम्मेदारी देगी, चाहे वह जोधपुर की हो, जालौर की हो, पूरे राजस्थान की हो, या दिल्ली में संगठन के किसी पद की हो, मैं उसे सहर्ष स्वीकार करूँगा, लेकिन खुद से कोई माँग नहीं करूँगा। हाईकमान जो भी फैसला करेगा, मुझे मंज़ूर है। मैं देश का सबसे संतुष्ट राजनीतिज्ञ (Politician) हूँ। जब मुझे पार्टी से बिना माँगे सब कुछ मिला है, मैं इंदिरा गांधी जी के समय ही केंद्रीय मंत्री बन गया था तो फिर अब मैं किसी पद की लालसा क्यों रखूँ?
आज देश और पार्टी के सामने बहुत बड़ी चुनौतियाँ हैं, जिन्हें हमें गहराई से समझना होगा। हमारा एकमात्र लक्ष्य पार्टी को हर स्तर पर मज़बूत करना है। राहुल गांधी जी ने स्पष्ट रूप से आह्वान किया है कि दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों (Minorities) पर कहीं भी कोई अन्याय या अत्याचार हो, तो कांग्रेस कार्यकर्ता तुरंत उनके पास पहुँचे, उनके सुख-दुख का साथी बने और ज़रूरत पड़ने पर उनके हक के लिए बड़ा आंदोलन खड़ा करे। राहुल जी की इस बात में हमारी भविष्य की पूरी राजनीति और सेवा का मर्म आ जाता है।
Sangod, Kota | Jun 23, 2026