दयोदय गौशाला उदयगिरि का 5-जे मॉडल बना पर्यावरण संरक्षण और गौसंवर्धन का अभिनव उदाहरण
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विदिशा की दयोदय गौशाला, उदयगिरि द्वारा शुरू किया गया साइलेज निर्माण मॉडल किसानों, गोपालकों तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक अभिनव पहल के रूप में उभर रहा है। गौशाला अध्यक्ष आकाश जैन के नेतृत्व में संचालित "5-जे मॉडल" के रूप में विकसित किया गया है, जो पराली प्रबंधन, गौसंवर्धन और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है। गौशाला द्वारा दुग्धिया अवस्था की मक्के की फसल से साइलेज तैयार किया जा रहा है। अचार की तर्ज पर तैयार होने वाला यह साइलेज वर्षभर सुरक्षित रहता है और गोवंश के लिए पौष्टिक चारे के रूप में उपयोग किया जाता है। इस व्यवस्था से किसानों को खड़ी फसल का उचित मूल्य मिलने के साथ-साथ खेतों में अवशेष जलाने की आवश्यकता भी समाप्त हो रही है।
▪️ जल संरक्षण में सहायक -
साइलेज मॉडल के अंतर्गत खेतों से फसल अवशेष हट जाने के कारण भूमि शीघ्र अगली फसल के लिए तैयार हो जाती है। पराली नहीं जलने से भूमि की नमी सुरक्षित रहती है तथा अगली फसल की पलेवा में कम पानी की आवश्यकता पड़ती है। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
▪️ जमीन की उर्वरता बनी रहती है -
पराली जलाने से भूमि के उपयोगी सूक्ष्म जीव, केंचुए तथा पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। साइलेज मॉडल के माध्यम से अवशेषों का सदुपयोग होने से खेतों की प्राकृतिक उर्वरता एवं जैविक कार्बन संरक्षित रहता है। इससे किसानों को उर्वरकों पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम करना पड़ता है।
▪️ गोवंश को मिलता है पोषक आहार -
दुग्धिया मक्के से तैयार साइलेज ऊर्जा, प्रोटीन और पोषण से भरपूर होता है। इसके उपयोग से गोवंश को वर्षभर गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध होता है। इससे पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार होने के साथ दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में भी सहायता मिलती है तथा गौशालाओं की चारा व्यवस्था अधिक सुदृढ़ बनती है।
▪️ पर्यावरण और आमजन दोनों को लाभ -
पराली न जलने से वायु प्रदूषण, धुआं और धूलकणों में कमी आती है। इससे आमजन को स्वच्छ वातावरण मिलता है तथा स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम होते हैं। साथ ही किसानों को खड़ी फसल का उचित मूल्य, खेत की साफ-सफाई तथा पराली जलाने से संबंधित समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इस संबंध में गौशाला अध्यक्ष श्री आकाश जैन ने बताया कि किसानों को एक व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध कराकर पराली जलाने की समस्या को समाप्त किया जा सकता है। यदि फसल को समय पर काटकर साइलेज में परिवर्तित किया जाए तो यह न केवल गोवंश के लिए पौष्टिक आहार उपलब्ध कराता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कृषि हित में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दयोदय गौशाला उदयगिरि की यह पहल गौसेवा, किसान कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। "5J मॉडल" मध्यप्रदेश सहित अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक अनुकरणीय और टिकाऊ व्यवस्था के रूप में उभर रहा है।
▪️ 60 लाख की लागत से विकसित 5J मॉडल किसानों के लिए लाभकारी -
दयोदय गौशाला उदयगिरि द्वारा लगभग 60 लाख रुपये की लागत से विकसित साइलेज निर्माण किसानों, गोपालकों और पर्यावरण संरक्षण के लिए लाभकारी साबित हो रही है। मक्का की फसल उगाने वाले किसान भी इस मॉडल का लाभ लेकर अपनी खड़ी फसल का उचित मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। जल, जंगल, जमीन, जानवर और जन पर आधारित 5J मॉडल पराली प्रबंधन, गौसंवर्धन और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी एवं टिकाऊ समाधान बनकर उभरा है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ प्रदूषण नियंत्रण और पशुओं को पौष्टिक चारा उपलब्ध कराने में भी मदद मिल रही है। #kisan #vidisha
24 views | Vidisha, Madhya Pradesh | Oct 21, 2026